सरकारी सेवा और निजी क्षेत्र की कंपनियों में मोेटी सैलरी से ही भविष्य सुरक्षित नहीं होता। अगर प्रभावी योजना और पूरी लगन के साथ स्वरोजगार को आर्थिकी का जरिया बनाया जाए तो उज्ज्वल भविष्य की गारंटी सुनिश्चित है। कुछ यही संदेश दे रही हैं दून की श्वेता अग्रवाल और सृष्टि काला।
इन्होंने डेढ़ साल पहले पशु पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया था। आज दोनों महिला उद्यमी स्वरोजगार के क्षेत्र में लोगों के लिए प्रेरण बनीं हुई हैं। इस पेशे से उन्होंने 22 लोगों को भी रोजगार दिया है। श्वेता और सृष्टि ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष पहले चार गायों से स्वरोजगार की शुरुआत की थी।
तब उनके लिए यह पेशा बिल्कुल नया था, लेकिन उन्होंने पूरी लगन और मेहनत से इस काम को अंजाम दिया। थोड़ा समय लगा, लेकिन धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा। बताया कि आज उनके शिमला बाईपास रोड स्थित प्लांट में 40 गायें हैं, इनमें साहीवाल और एचफ (हाल्सहाइम फ्रिजन) गायें शामिल हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 600 लीटर दुग्ध उत्पादन होता है।
