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सवाल है कि जब भारत ने दुनिया के सामने यह साफतौर पर कहा है कि अपने संप्रभु क्षेत्र की स्थितियों को वह खुद ठीक कर सकता है और इसमें किसी अन्य की भूमिका नहीं है, उसके बावजूद चीन को इस तरह की बेमानी रुचि दर्शाने की जरूरत क्यों पड़ी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के ताजा भारत दौरे के लिहाज से देखें तो बेजिंग में पाकिस्तान और चीन की बैठक में कश्मीर मुद्दे को लेकर जताई गई चिंता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि भारत अपनी स्थितियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

कश्मीर के संदर्भ में चीन के ताजा रुख पर भारत की तुरंत और तीखी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और इससे चीन के साथ-साथ पाकिस्तान को भी समझने की जरूरत है कि किसी भी देश के संप्रभु क्षेत्र की समस्याओं को अनावश्यक विस्तार देने से नई जटिलताएं खड़ी होती हैं। पाकिस्तान और चीन के बीच संबंध कैसे होंगे, इसके बारे में वही दोनों देश तय करेंगे। लेकिन जरूरत इस बात की है कि किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में गैरजरूरी तरीके से हस्तक्षेप से बचा जाए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के ताजा भारत दौरे के लिहाज से देखें तो बेजिंग में पाकिस्तान और चीन की बैठक में कश्मीर मुद्दे को लेकर जताई गई चिंता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि भारत अपनी स्थितियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। फिर भी चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक यह खबर आई कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने कश्मीर में स्थिति की निगरानी करने की बात कही और उम्मीद जताई कि ‘संबंद्ध पक्ष’ शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए मुद्दे का हल कर सकते हैं।

सवाल है कि जब भारत ने दुनिया के सामने यह साफतौर पर कहा है कि अपने संप्रभु क्षेत्र की स्थितियों को वह खुद ठीक कर सकता है और इसमें किसी अन्य की भूमिका नहीं है, उसके बावजूद चीन को इस तरह की बेमानी रुचि दर्शाने की जरूरत क्यों पड़ी! स्वाभाविक ही भारत की ओर से यह कड़ी प्रतिक्रिया आई कि इस मुद्दे पर नई दिल्ली के रुख से बेजिंग ‘अच्छी तरह से अवगत’ है और हमारे आंतरिक मामलों पर अन्य देश टिप्पणी न करें। वैश्विक तकाजों के मुताबिक देखें तो एक संप्रभु देश को दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए, उसके बाद ही उसे अपने लिए ऐसे रुख की उम्मीद करनी चाहिए। लेकिन कश्मीर के बहाने से पाकिस्तान ने लंबे समय से जिस तरह का रुख अपनाया हुआ है, उसे उचित नहीं कहा जा सकता। यों दुनिया के तमाम देशों को यह जानकारी होगी कि कश्मीर भारत का हिस्सा है तो इस मामले में किसी तीसरे को अपनी ओर से दखल देने की जरूरत नहीं है। लेकिन किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर या दूसरे देशों में मौका मिलते ही पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को विवादित बना कर पेश करने से नहीं चूकता है। उसकी ऐसी ही कोशिशों का नतीजा है कि कई बार कुछ देश कश्मीर के मसले पर भ्रमित हो जाते हैं।

यह संभव है कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के चीन दौरे में कुछ ऐसी बातें हुई हों, जिसके चलते चीन ने कश्मीर मामले में एक उलझा हुआ रुख सामने रखा। हालांकि पड़ोसी देश होने के नाते उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह भारत की वास्तविकता और तकाजों को समझेगा और उसी के मुताबिक अपनी स्थिति साफ रखेगा। लेकिन विडंबना यह है कि पाकिस्तान से संबंध निभाने के क्रम में अगर वह भारतीय सीमाक्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की अनदेखी करता है तो यह स्थितियों को जटिल ही बनाएगा। भारत ने कश्मीर के संबंध में कोई अहम फैसला किया और वहां के लोगों को इससे आपत्ति नहीं है, तो पाकिस्तान को चिंता जताने की जरूरत आखिर क्यों है? संयुक्त राष्ट्र में या फिर अमेरिका और चीन आदि के सामने इस समस्या को उलझाने की उसकी कोशिश से कोई सकारात्मक नतीजे नहीं अने वाले। फिर चीन की यह कोशिश होनी चाहिए कि पाकिस्तान से इतर वह भारत के साथ अलग-अलग स्तर पर अपने संबंधों को नया आयाम दे।


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By udaen

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