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wilbur ross

अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने दो टूक शब्दों में भारत को व्यापार करने के लिए विशेषाधिकार देने से मना करते हुए कहा कि हम जीएसपी पर बात कर सकते हैं। भारत के दौरे पर आए रॉस ने विश्व आर्थिक मंच के बैनर तले दिल्ली में आयोजित हो रहे इंडिया इकोनॉमिक समिट के इतर कहा कि अमेरिका चाहता है कि, वो भारत के साथ एक समान व्यापार करे। हालांकि भारत लगातार संरक्षणवादी नीतियों पर चल रहा है, जिसके चलते कई मुद्दों को सुलझाने में दिक्कत आ रही है।

जल्द सुलझेगा जीएसपी का मुद्दा

रॉस ने कहा कि अमेरिका और भारत मिलकर जीएसपी के मुद्दे को सुलझा सकते हैं। एक समाचार एजेंसी  को दिए इंटरव्यू में रॉस ने कहा कि, “यदि हम जीएसपी के मुद्दे को सुलझा लेते हैं तो यह मुक्त व्यापार की दिशा में बढ़िया कदम होगा। उम्मीद करते हैं कि दोनों देशों के बीच इस खाई को भरने में हम सफल होंगे और भारत के साथ अधिक लाभकारी व्यापार समझौता कर सकेंगे।”

भारत को हो रहा है 40 हजार करोड़ का नुकसान

अमेरिका ने भारत को मिले जीएसपी के दर्जे को इसी साल वापस ले लिया था। जीएसपी के तहत विकासशील देशों को आयात शुल्क से छूट मिलती थी। भारत के अमेरिका जाने वाले दो हजार से अधिक उत्पादों पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगता था, जिससे सालाना 40 हजार करोड़ रुपये की बचत होती थी। अमेरिका द्वारा जीएसपी हटाने के बाद जुलाई मे भारत ने भी अमेरिका से आयात होने वाले बादाम, अखरोट और सेब सहित 28 उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया था।

इसलिए लगाया था जीएसपी

ट्रम्प का कहना था कि उन्हें भारत से यह भरोसा नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है। वह जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है। अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी।

ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई के दायरे में

एक फरवरी को केंद्र सरकार ने अमेजन-फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों पर एफडीआई के नए नियम लागू कर दिए थे। सरकार ने रिटेल सेक्टर में कार्यरत छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया था। नियम लागू होने के बाद इन कंपनियों ने ज्यादा छूट देना बंद कर दिया था।  ऐसा माना जाता है कि इसके बाद अमेरिका ने भारत पर संरक्षणवादी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए जीएसपी दर्जा वापस लिया था।

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By udaen

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