
खास बातें
- मात्र 20 रुपये खर्च करने पर पसीने की जांच से आनुवांशिक बीमारी का पता लगाया जा सकता है
- अब दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक भी एम्स की इस नायाब मशीन के बारे में सुनकर हैरान हो चुके हैं
- एम्स ने इस मशीन को अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हुए प्रदर्शनी में रखा है
मात्र 20 रुपये खर्च करने पर पसीने की जांच से आनुवांशिक बीमारी का पता लगाया जा सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) करीब 20 वर्षों से देशी मशीन के जरिये सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी दुर्लभ बीमारी की जांच कर रहा है। अब दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक भी एम्स की इस नायाब मशीन के बारे में सुनकर हैरान हो चुके हैं। एम्स ने इस मशीन को अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हुए प्रदर्शनी में रखा है।
एम्स के बालरोग विभाग के डॉ. एसके काबरा बताते हैं कि सिस्टिक फाइब्रोसिस एक अनुवांशिक बीमारी है जोकि शरीर के कई भागों को प्रभावित करता है। आमतौर पर विदेशों में इस रोग की जांच के लिए करीब 10 से 15 लाख रुपये की मशीन है।
भारत में भी निजी क्लीनिक में इस जांच के 5 हजार रुपये लगते हैं। लेकिन एम्स में स्वदेशी मशीन पर जांच कराने का खर्च करीब 20 रुपये के आसपास है। फिलहाल करीब 700 बच्चे इस बीमारी के चलते एम्स में अपना उपचार करा रहे हैं। हर वर्ष करीब 600 मरीजों की जांच एम्स देशी मशीन से कर रहा है।
