अवैध रूप से भूजल का दोहन करने वालों पर प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। प्रशासन की ताजातरीन जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि दून में 652 प्रतिष्ठान भूजल का दोहन नियमों के विपरीत कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पूरी कुंडली तैयार करने के बाद अब उप जिलाधिकारी सदर ने नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ताकि अवैध बोरवेल को बंद किया जा सके।

एक अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने जून माह में प्रशासन को अवैध रूप से बोरवेल/ट्यूबवेल लगाकर भूजल का दोहन करने वाले लोगों की जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए उन्होंने उप जिलाधिकारी सदर के समन्वय में एक जांच कमेटी भी गठित कर दी थी।

अब इस कमेटी की रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि देहरादून शहर से लेकर विकासनगर और ऋषिकेश क्षेत्र तक 652 अवैध बोरवेल आदि स्थापित किए गए हैं। अकेले देहरादून शहर के मुख्य क्षेत्रों में ही 64 बोरवेल अवैध रूप से रात-दिन भूजल गटक रहे हैं। उप जिलाधिकारी कार्यालय ने रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए ऐसे बोरवेल को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस दिशा में पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

मॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में अवैध दोहन 

भूजल का दोहन न सिर्फ देहरादून के बड़े कमर्शियल प्रतिष्ठनों में हो रहा है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। अवैध भूजल दोहन का यह आंकड़ा भी बेहद कम समय में एकत्रित किया गया है, लिहाजा इनकी संख्या में और अधिक हो सकती है।

इन सरकारी प्रतिष्ठानों में अवैध दोहन 

तपोवन स्थित मुख्य विकास अधिकारी आवास, कौलागढ़ स्थित पुलिस थाना, सचिवालय कॉलोनी, कालसी स्थित निर्माणाधीन आइटीआइ भवन, जीवनगढ़ में राज्य कर कार्यालय, एम्स ऋषिकेश, राजकीय डिग्री कॉलेज ऋषिकेश (कुल सात प्रतिष्ठान) 

अवैध बोरवेल की स्थिति 

देहरादून शहर 

उत्तर जोन, 50 बोरवेल/ट्यूबवेल

दक्षिण जोन, 14 बोरवेल/ट्यूबवेल

शामिल प्रमुख इलाके (राजपुर रोड, चकराता रोड, अधोईवाला, सहारनपुर रोड, हरिद्वार रोहए देहराखास, बाईपास रोड, रायपुर, सहस्रधारा रोड, रेसकोर्स।

देहरादून और उससे सटे क्षेत्र 

पित्थूवाला जोन, 99 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके (जीएमएस रोड, इंदिरा नगर, टर्नर रोड, सेवला कलां, बड़ोवाला, आइएसबीटी क्षेत्र, माजरा, पंडितवाड़ी)

दून के बाहरी इलाके 

विकासनगर/कासली, 98 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके (विकासनगर शहर, कालसी गेट, लïक्ष्मीपुर, जीवनगढ़)

रायपुर क्षेत्र, 97 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके (जोगीवाला, राजीव नगर, सरस्वती विहार)

सहसपुर क्षेत्र, 66 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके (झाझरा, सुद्धौंवाला, कोल्हूपानी, बिधोली, सेलाकुई, पौंधा)

डोईवाला/दूधली क्षेत्र, 214 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके (दूधली, जौलीग्रांट, खट्टा पानी, बुल्लावाला, अठूरवाला-कंडल, फतेहपुर, शेरगढ़, माजरी ग्रांट, लाल तप्पड़, बड़कोट, भोगपुर, रानीपोखरी, छिद्दरवाला)

ऋषिकेश क्षेत्र, 07 बोरवेल/ट्यूबवेल

प्रमुख इलाके, ऋषिकेश, श्यामपुर, मुनिकीरेती।

यह हैं नियम, मगर पालन नहीं 

‘कुमाऊं और गढ़वाल (संग्रह, संचय और वितरण) अधिनियम-1975 की धारा 06 में उल्लिखित प्रावधानों के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति उत्तर प्रदेश जल संभरण और सीवर अध्यादेश 1975’ के अधीन परगनाधिकारी (उपजिलाधिकारी) की अनुमति के बिना किसी भी जल स्रोत से पानी नहीं निकाल सकेगा। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन को ही अवैध बोरवेल पर कार्रवाई का अधिकार है। स्पष्ट नियम के बाद भी आज तक प्रशासन मौन साधे रहा। अब देखने वाली बात यह है कि सूचना आयोग के आदेश के बाद जांच में जो बात सामने आई है, उस पर क्या कार्रवाई की जाती है।