प्रदेश में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण अनिवार्य किया जा रहा है। प्राकृतिक जल स्रोतों की मैपिंग होगी और इनके संरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से उपाय किए जाएंगे। यह प्रावधान जल नीति में किए जाएंगे। जिसका मसौदा तैयार कर लिया गया है। सचिव सिंचाई भूपेंद्र कौर औलख के मुताबिक यह मसौदा मंत्रिमंडल की अगली बैठक में रखा जाएगा।
भूजल के अनावश्यक दोहन को रोकने के लिए भी नीति में प्रावधान किए गए हैं। भूजल के हिसाब से अतिसंवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस रखा गया है। चाल खाल, नदियों के पुर्नोद्धार, जल संचय की नई संरचनाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा। वहीं, नई जल नीति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर खासा जोर है। सरकार का मानना है कि प्रदेश की जल मांग की पूर्ति करने में बारिश सक्षम है। इस पानी का उपयोग न करना अक्षम्य है। नीति में इस काम को न करने पर दंडात्मक कदम उठाने का भी प्रावधान है। वहीं, प्राकृतिक जल स्रोत, भूजल, बारिश, नदियां आदि की मैपिंग के लिए नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट, आईटीआई सहित अन्य संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा
खास बातें
– पानी की गुणवत्ता पर फोकस , वाटर ऑडिट होगा, जुर्माने का भी प्रावधान
– जल स्रोतों की मैपिंग होगी और इनके संरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से उपाय होंगे
– मंत्रिमंडल की अगली बैठक में रखा जाएगा मसौदा
