दिव्यांगजनों को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराते हुए उनके जीवन स्तर में गुणात्मक रूप से सुधार किया जाय, ताकि वे समाज की मुख्य धारा में न केवल जुड़ सके बल्कि अपनी सहभागिता भी सुनिष्चित कर सके।
दिव्यांगजनों को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराते हुए उनके जीवन स्तर में गुणात्मक रूप से सुधार किया जाय, ताकि वे समाज की मुख्य धारा में न केवल जुड़ सके बल्कि अपनी सहभागिता भी सुनिष्चित कर सके। यह बात जिलाधिकारी रंजना राजगुरू ने आज दिव्यांगजनों के विधिक अभिभावक नियुक्त किये जाने के संबंध में लोकल लेवल कमेटी की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी एन.एस.गस्याल ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि नेषनल ट्रस्ट 1999 की धारा 13(1) के अनुसार लोकल लेवल कमेटी गठित की गई है जो कार्यों के साथसाथ दिव्यांगों के विधिक अभिभावक नियुक्त करने के संबंध में भी कार्य करेंगी। उल्लेखनीय है कि एक्ट के अनुसार दिव्यांगों को 04 श्रेणीयों में विभाजित किया गया है जिसमें बहु विकलांगता, मानसिक रूप से विकलांग, प्रमस्तिश्क घात, आॅटिज्म सम्मलित है। जिसका मुख्य उद्देष्य गरीब विकलांगों को उपरोक्त 04 श्रेणीयों में विभाजित करते हुए उनके विधिक अभिभावक नियुक्त करना है। उक्त से सन्दर्भ में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी संजय कुमार षाह को निर्देषित करते हुए कहा कि वे द्विव्यागों के संबंध में बनाये गये अद्यतन सूची को जिला समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय करते हुए उपरोक्त 04 श्रेणीयों में विभाजित कर अग्रेत्तर कार्यवाही करना सुनिष्चित करें, जिससे दिव्यांगों को और अधिक बेहतर सुविधायें एवं विधिक संरक्षक भी प्रदान किये जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा दिव्यांगों के संबंध में संचालित युनिक एडेंटटि योजना का जल्द से जल्द जिले में क्रियान्वयन करना सुनिष्चित करें ताकि जिले के दिव्यांगों को युनिक एडेंटटि प्रदान किया जा सके जिसके माध्यम से वे भारतवर्श में कहीं भी दिव्यांगों को दिये जाने वाले सुविधाओं का उपयोग कर सके। जिलाधिकारी ने कहा कि द्विव्यांग व्यक्ति को जीवन के कई क्षेत्र में तथ्यों व परिस्थितियों के आधार पर कानूनी प्रतिनिधित्व के आवष्यकता होती है जैसे निवेष के प्रबन्धन, बैंकिंग लेनदेन आदि हेतु संरक्षककर्ता के रूप में इसके अतिरिक्त एन.एच.एफ.डी.सी. और अन्य सरकारी आवास आदि योजना हेतु ऋण आदि लेने के लिए विधिक अभिभावक के रूप में। इसलिए यह आवष्यक है कि ट्रस्ट अधिनियम के अनुरूप उक्त कार्यवाही जल्द से जल्द की जाय। जिलाधिकारी ने इस बात पर भी बल दिया कि दिव्यांगों हेतु विधिक अभिभावक नियुक्त करते समय इस बात का विषेश ध्यान रखा जाय कि नियुक्त होने वाले विधिक अभिभावक अनैतिक रूप में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में लाभ की प्रत्याषा रखते हुए इस कार्य हेतु आवेदन न करें। साथ ही यह भी सुनिष्चित किया जाय कि नियुक्त किये जाने वाले विधिक अभिभावक दिव्यागों के संरक्षण एवं देखभाल के साथसाथ उनके जीवन स्तर में गुणात्मक रूप में बृद्धि करना सुनिष्चित करें। इसके लिए यह आवष्यक है कि नेषनल ट्रस्ट अधिनियम में वर्णित धारा के अनुरूप पूरी प्रक्रिया का विधिवत रूप में अनुपालन सुनिष्चित किया जाय और भारत सरकार के पोर्टल पर कृत कार्य को अपलोड भी किया जाय। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी संजय कुमार षाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी एन.एस.गस्याल, जिला पूर्ति अधिकारी अरूण कुमार वर्मा, जिला प्रोवेषन अधिकारी संतोश जोषी सहित अन्य संबंधित व्यक्ति मौजूद रहे।
