सोशल मीडिया पर भ्रामक और AI जनरेटेड सामग्री के प्रसार पर जताई चिंता, जिम्मेदार पत्रकारिता और तथ्यपरक सूचना पर दिया जोर
देहरादून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच समाचारों की विश्वसनीयता और तथ्यपरकता का सवाल लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे दौर में समाचार पत्रों की भूमिका और प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। यह बात महानिदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, उत्तराखंड श्री बंशीधर तिवारी ने कही।
उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कई बार बिना जिम्मेदारी के सामग्री प्रसारित कर दी जाती है। AI के माध्यम से तैयार की गई भ्रामक अथवा गलत सामग्री भी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। ऐसे वातावरण में समाचार पत्र अपनी प्रामाणिकता, संपादकीय प्रक्रिया और तथ्यों के सत्यापन के कारण महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
बंशीधर तिवारी ने कहा कि किसी भी सूचना को सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने या साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। एक बार गलत सूचना व्यापक स्तर पर प्रसारित हो जाए तो उसका प्रभाव केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा कर सकता है।
AI उपयोगी तकनीक, लेकिन जिम्मेदारी जरूरी
महानिदेशक सूचना ने AI को उपयोगी तकनीक बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल समय और संसाधनों की बचत के लिए किया जा सकता है, लेकिन AI से तैयार सामग्री को बिना जांचे-परखे प्रकाशित या प्रसारित करना उचित नहीं है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि AI मानव की क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहयोगी उपकरण होना चाहिए। पूर्व में देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस की कार्यशाला में भी उन्होंने कहा था कि AI से कंटेंट तैयार किया जा सकता है, लेकिन उसमें मानवीय विचार, अनुभव और संवेदनशीलता का समावेश जरूरी है।
पत्रकारिता में तथ्य-जांच की बढ़ी जिम्मेदारी
AI के विस्तार ने पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। अब फोटो, वीडियो, ऑडियो और यहां तक कि किसी व्यक्ति के बयान जैसी दिखने वाली सामग्री भी तकनीक के माध्यम से तैयार की जा सकती है। ऐसे में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के लिए फैक्ट-चेकिंग, स्रोतों की पुष्टि और संपादकीय जवाबदेही पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
समाचार पत्रों की विशेषता यह है कि उनके प्रकाशन से पहले समाचार सामान्यतः रिपोर्टिंग, स्रोतों की पुष्टि, संपादन और संपादकीय प्रक्रिया से गुजरता है। यही प्रक्रिया पाठकों के सामने प्रकाशित सूचना की विश्वसनीयता बढ़ाती है।
सोशल मीडिया बनाम प्रिंट मीडिया नहीं, बल्कि जिम्मेदार सूचना की जरूरत
हालांकि डिजिटल और सोशल मीडिया ने सूचना को तेजी से लोगों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई है, लेकिन गति के साथ विश्वसनीयता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। सोशल मीडिया को समाचारों के त्वरित प्रसार का माध्यम माना जा सकता है, जबकि समाचार पत्र और जिम्मेदार डिजिटल मीडिया तथ्यपरक और संदर्भित जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बंशीधर तिवारी ने पहले भी AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा था कि तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों और जिम्मेदारी को बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना था कि किसी सूचना को आगे भेजने से पहले यह विचार करना चाहिए कि वह सही है या गलत, क्योंकि गलत सूचना का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ता है।
पाठकों की भी है जिम्मेदारी
वर्तमान डिजिटल युग में फेक न्यूज और AI जनरेटेड कंटेंट की पहचान केवल पत्रकारों की जिम्मेदारी नहीं है। आम पाठकों और सोशल मीडिया यूजर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसी सनसनीखेज खबर, वीडियो या तस्वीर को साझा करने से पहले उसके स्रोत, तारीख, संदर्भ और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
ऐसे समय में पत्रकारिता का मूल सिद्धांत—“पहले सत्यापन, फिर प्रकाशन”—और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। तकनीक चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, विश्वसनीय पत्रकारिता की बुनियाद तथ्य, स्रोत, मानवीय विवेक और सार्वजनिक जवाबदेही ही रहेगी।
