प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण, जनभागीदारी और बेहतर प्रबंधन से बढ़ी राष्ट्रीय पशु बाघों की संख्या
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि देश की जैव विविधता, प्राकृतिक संतुलन और समृद्ध पारिस्थितिकी का प्रतीक है। किसी भी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि वहां का जंगल, जल स्रोत, वनस्पति और वन्यजीव श्रृंखला स्वस्थ एवं संतुलित है। यही कारण है कि बाघ संरक्षण को विश्वभर में जैव विविधता संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया जाता है। उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2018 की अखिल भारतीय बाघ गणना में जहां प्रदेश में 173 बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं 2022 की गणना में उनकी संख्या बढ़कर 205 हो गई। यह वृद्धि वन्यजीव संरक्षण की नीति बेहतर वन प्रबंधन, वैज्ञानिक संरक्षण, जनभागीदारी और सरकार की सतत वन्यजीव संरक्षण नीति का परिणाम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृृत्व में आज उत्तर प्रदेश न केवल बाघों की संख्या बढ़ाने में सफल हुआ है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने और आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का एक प्रभावी मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है। बाघ संरक्षण की सफलता हेतु प्रदेश सरकार ने किए सुनियोजित कार्य बाघों की संख्या में वृद्धि किसी संयोग का परिणाम नहीं होती। इसके लिए वर्षों तक सतत प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और प्राकृतिक आवास का संरक्षण आवश्यक होता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हीं पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। प्रदेश में बाघों के प्राकृतिक आवास का बेहतर प्रबंधन, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था, अवैध शिकार पर नियंत्रण तथा जंगलों के संरक्षण के कारण प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित अवधि से पहले ही बाघ संरक्षण के लक्ष्य प्राप्त करने के कारण पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। वन विभाग ने केवल बाघों की सुरक्षा तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे, बल्कि उनके प्राकृतिक भोजन जैसे हिरण और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों-की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष कार्य किए। इसके लिए घास के मैदानों (ग्रासलैंड) का विकास, जल स्रोतों का संरक्षण, प्राकृतिक वनस्पतियों का संवर्धन तथा आवास सुधार जैसे अनेक कदम उठाए गए है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही है बाघों की संख्या उत्तर प्रदेश में बाघों की आबादी का सफर लगातार प्रगति की कहानी रही है। वर्ष 2006 में प्रदेश में 109 बाघ दर्ज किए गए। वर्ष 2010 में यह संख्या बढ़कर 118 हुई। वर्ष 2014 में 117 बाघ दर्ज हुए। वर्ष 2018 में संख्या बढ़कर 173 हो गई। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 205 तक पहुंच गया। यह वृद्धि स्पष्ट करती है कि प्रदेश में संरक्षण की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हुई हैं और उनका सकारात्मक परिणाम सामने आया है। प्रदेश में वर्तमान समय में चार प्रमुख – ’दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, ’अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, ’रानीपुर टाइगर रिजर्व वन है। भारत में वर्तमान समय में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें रानीपुर टाइगर रिजर्व देश का 53वां टाइगर रिजर्व है। वर्ष 2022 में इसकी स्थापना उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र की जैव विविधता को नया संरक्षण मिला और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की भूमिका और मजबूत हुई।
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SHABD,lucknow, August 22,
