केरल विधानसभा में वरिष्ठ नागरिक अधिकार विधेयक 2026 सर्वसम्मति से पारित, बुजुर्गों के लिए बनेगी ‘सिल्वर इकॉनमी’
बुजुर्गों की देखभाल, सुरक्षा और सम्मान को मिलेगा कानूनी आधार; वृद्धजनों के साथ दुर्व्यवहार और संपत्ति पर अवैध कब्जे पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान
तिरुवनंतपुरम। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने की दिशा में केरल विधानसभा ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विधानसभा ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य बुजुर्गों को केवल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक सीमित न रखते हुए उन्हें सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का सक्रिय भागीदार बनाना है।
विधेयक में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के साथ-साथ उनके अनुभव, ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करते हुए एक नई ‘सिल्वर इकॉनमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में कहा कि दुनिया में पहली बार ऐसा कानून पारित किया गया है, जो वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की गारंटी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र का माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 तथा केरल का वरिष्ठ नागरिक आयोग अधिनियम, 2025 भी इस तरह के व्यापक अधिकारों की गारंटी नहीं देते।
चर्चा के दौरान आए लगभग 1,300 संशोधन
विधेयक पर विधानसभा में व्यापक चर्चा हुई। सदस्यों की ओर से लगभग 1,300 संशोधन पेश किए गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के सुझावों पर विचार करने के बाद विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
इस कानून में वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, स्वतंत्रता, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है।
बुजुर्गों को मिलेंगे सात प्रमुख अधिकार
विधेयक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण अधिकारों का प्रावधान किया गया है।
- सम्मान और गरिमा का अधिकार: बुजुर्गों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देना।
- सुलभ देखभाल: घर पर ही किफायती देखभाल और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना।
- सुरक्षित सार्वजनिक स्थान: सरकारी भवनों, सार्वजनिक सुविधाओं और सेवाओं को बुजुर्गों के अनुकूल बनाना।
- डिजिटल समावेशन: डिजिटल जानकारी न रखने वाले बुजुर्गों को भी बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और टेलीमेडिसिन की सुविधा देना।
- निःशुल्क कानूनी सहायता: वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
- सहायक उपकरणों की उपलब्धता: व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चश्मे और अन्य जरूरी उपकरण उचित कीमत पर उपलब्ध कराना।
- महिला वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा: विधवा, बेसहारा, दिव्यांग और हिंसा से प्रभावित बुजुर्ग महिलाओं को आश्रय और देखभाल में प्राथमिकता देना।
दुर्व्यवहार और संपत्ति पर अवैध कब्जे पर सख्त कार्रवाई
विधेयक में वरिष्ठ नागरिकों के साथ शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार, उत्पीड़न, संपत्ति पर अवैध कब्जे और उन्हें बेसहारा छोड़ने जैसे मामलों को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है।
ऐसे अपराधों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा पंजीकृत चिकित्सकों और वरिष्ठ नागरिक देखभाल केंद्रों के लिए बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, उपेक्षा या शोषण के मामलों की जानकारी जिला स्तरीय संरक्षण इकाई को 48 घंटे के भीतर देना अनिवार्य होगा।
वृद्धाश्रम और केयर सेंटर का अनिवार्य पंजीकरण
नए कानून के तहत वृद्धाश्रम, रिटायरमेंट होम, डे-केयर सेंटर, असिस्टेड लिविंग सुविधाओं और होम केयर एजेंसियों का सरकारी पंजीकरण अनिवार्य होगा।
देखभाल करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। उनके पुलिस सत्यापन और समय-समय पर प्रशिक्षण की व्यवस्था का प्रावधान है।
इससे बुजुर्गों की देखभाल को एक व्यवस्थित सेवा क्षेत्र के रूप में विकसित करने और प्रशिक्षित लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र
विधेयक में राज्य और जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिक संरक्षण इकाइयों तथा जिला स्तरीय संरक्षण मंचों के गठन का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से बचाने के लिए साइबर पुलिस व्यवस्था में विशेष प्रकोष्ठ बनाए जाने का प्रस्ताव है।
वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के अंतिम चरण में चिकित्सा संबंधी अपनी इच्छाएं पहले से दर्ज कराने के लिए ‘लिविंग विल’ की व्यवस्था भी शामिल की गई है।
बुजुर्गों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर
इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सिल्वर इकॉनमी की अवधारणा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुजुर्गों को निष्क्रिय जीवन जीने के बजाय अपनी क्षमता, अनुभव और ज्ञान के माध्यम से समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान देने के अवसर मिलने चाहिए।
इसके तहत प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की नई कार्यशक्ति तैयार करने, घर आधारित देखभाल सेवाओं को बढ़ावा देने और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रोजगार एवं आय सृजन के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने विधायकों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बुजुर्गों के लिए मॉडल परियोजनाएं तैयार करने का भी आह्वान किया।
विधेयक के कानून बनने की अगली प्रक्रिया
विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी और राजपत्र में अधिसूचना की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद नियमों के माध्यम से विभिन्न प्रावधानों को लागू किया जाएगा।
उत्तराखंड के लिए भी महत्वपूर्ण उदाहरण
केरल की यह पहल उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तराखंड के अनेक गांवों में युवा रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं और बुजुर्ग अकेले जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ऐसे में वृद्धाश्रम बनाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत ऐसे मॉडल की है, जिसमें बुजुर्गों को घर पर देखभाल, स्वास्थ्य सुविधाएं, कानूनी सुरक्षा, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के अवसर मिलें।
उत्तराखंड में भी सिल्वर इकॉनमी, सामुदायिक वृद्धजन केंद्र, प्रशिक्षित केयरगिवर, डे-केयर सेंटर और गांव आधारित वृद्धजन देखभाल व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
केरल का यह विधेयक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
स्रोत: द न्यूज मिनट, ऑनमनोरमा, पीटीआई एवं हिंदुस्तान टाइम्स की 26–27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें।
