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भारत में पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया।

 SHABD,Delhi, October 29,

अक्टूबर 29, नई दिल्ली:

 भारत में पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। इस दौरान अनुमानित 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।

रिपोर्ट के अनुसार, तीन डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के आधार पर अत्यधिक गरीबी की दर में भी बड़ी कमी आई है। वर्ष 2011 में यह दर 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। इस तरह आय के आधार पर गरीबी के दोनों प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

गरीबी में यह गिरावट ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में देखने को मिली। ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक गरीबी की दर 18.4 प्रतिशत से घटकर 2.8 प्रतिशत रह गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 10.7 प्रतिशत से गिरकर 1.1 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अत्यधिक गरीबी का अंतर 7.7 प्रतिशत अंक से घटकर 1.7 प्रतिशत अंक रह गया।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ने गरीबी में कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश में अत्यधिक गरीबी में आई कुल गिरावट का करीब दो-तिहाई हिस्सा इन पांच राज्यों से जुड़ा है। रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में सुधार का भी उल्लेख किया गया है।

विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, भारत में गरीबी में कमी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 2026 में अनुमानित 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 में 12.1 प्रतिशत तक आने का अनुमान है।


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By udaen

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