समाचार रिपोर्ट
चिपको आंदोलन के अग्रणी जननायक कुंवर प्रसून पर विचार गोष्ठी, ‘कलम का गांधी’ पुस्तक का लोकार्पण
देहरादून, 15 जुलाई। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में बुधवार को चिपको आंदोलन के अग्रणी जननायक, प्रखर पत्रकार, पर्यावरण योद्धा और सामाजिक कार्यकर्ता कुंवर प्रसून के पर्यावरणीय एवं सामाजिक सरोकारों पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर पत्रकार एवं लेखक शीशपाल गुसाईं द्वारा लिखित पुस्तक ‘कलम का गांधी : कुंवर प्रसून और जन-सरोकार’ का लोकार्पण भी किया गया।
पुस्तक का लोकार्पण कुंवर प्रसून की पत्नी रंजना भंडारी तथा मंचासीन अतिथियों की उपस्थिति में हुआ। वक्ताओं ने कहा कि कुंवर प्रसून ने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय, जंगल, जल, जमीन और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया तथा जनपक्षधर पत्रकारिता की एक सशक्त परंपरा स्थापित की।
कार्यक्रम में प्रो. जयंत बंद्योपाध्याय, विजय जड़धारी, राजीव लोचन साह, राजीव नयन बहुगुणा, जय सिंह रावत और संजय कोठियाल ने कुंवर प्रसून के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने पर्यावरणीय संघर्षों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया और विकास के साथ प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता पर हमेशा जोर दिया।
वक्ताओं ने चिपको आंदोलन, बीज बचाओ आंदोलन, खनन विरोध, समान शिक्षा अभियान तथा टिहरी बांध आंदोलन में कुंवर प्रसून की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सत्ता से समझौता नहीं किया और सदैव जनता तथा पर्यावरण के पक्ष में खड़े रहे।
लेखक शीशपाल गुसाईं ने बताया कि 244 पृष्ठों और 54 अध्यायों में प्रकाशित यह पुस्तक लगभग दो वर्षों के शोध, साक्षात्कारों और ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है। पुस्तक में कुंवर प्रसून के जीवन, जन आंदोलनों, पत्रकारिता और पर्यावरण संरक्षण के संघर्षों का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है।
गोष्ठी में वर्ष 1978 के ऐतिहासिक अदवाणी वन आंदोलन, बीज बचाओ आंदोलन, कटालड़ी खनन विरोध और टिहरी बांध आंदोलन में कुंवर प्रसून के योगदान को विशेष रूप से याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक बीजों, जैव विविधता और हिमालयी संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत है।
इस अवसर पर कुंवर प्रसून स्मृति मंच द्वारा वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला को प्रथम ‘कुंवर प्रसून स्मृति पर्यावरण एवं जनपक्षधर पत्रकारिता सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। उन्हें ₹11,000 की सम्मान राशि, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मध्य हिमालय और उत्तराखंड के जन-सरोकारों पर उनकी निरंतर एवं प्रतिबद्ध पत्रकारिता उन्हें इस सम्मान का योग्य अधिकारी बनाती है।
कार्यक्रम में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू, चारु तिवाड़ी, पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डी.के. पाण्डे सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार, पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती मिश्रा ने किया।
