राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार को मिला नया बल
राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान, कोलकाता में हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन
कोलकाता, 15 जुलाई। राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान (एनआईएलडी), कोलकाता द्वारा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), कोलकाता (कार्यालय-5) के तत्वावधान में हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. ललित नारायण ने किया। इस अवसर पर नराकास-कोलकाता (कार्यालय-5) की सदस्य सचिव श्रीमती देवश्री दत्ता तथा उपनिदेशक (प्रशासन) श्री सौगत बनर्जी सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता में कोलकाता स्थित 13 केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के 26 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। संस्थान के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने राजभाषा हिंदी से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देकर अपने ज्ञान, भाषा दक्षता और हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल सरकारी कामकाज की भाषा नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक एकरूपता और भाषाई समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिंदी के प्रयोग के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अंत में प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को निरंतर गति देने का संकल्प व्यक्त किया गया।
मुख्य बिंदु
- 15 जुलाई 2026 को आयोजित हुई हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता।
- नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), कोलकाता (कार्यालय-5) के तत्वावधान में आयोजन।
- 13 केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के 26 प्रतिभागियों ने लिया भाग।
- राजभाषा हिंदी के प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने पर दिया गया विशेष बल।
- अधिकारियों ने हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ऐसे आयोजनों को उपयोगी बताया।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), कोलकाता | दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार।
