उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्णतः साक्षर राज्य
राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना, NEP-2020 और ULLAS अभियान की बड़ी उपलब्धि
देहरादून, 9 जुलाई। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का छठा पूर्णतः साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। उत्तराखंड शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-03 द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने राज्य को पूर्णतः साक्षर राज्य घोषित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
सरकार के अनुसार, उत्तराखंड ने वयस्क साक्षरता के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे जनभागीदारी, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।
हाल के आधिकारिक आकलनों के अनुसार, राज्य की साक्षरता दर लगभग 98 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है, जिसके आधार पर उत्तराखंड को यह दर्जा मिला है।
ULLAS कार्यक्रम क्या है?
ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) भारत सरकार का वयस्क शिक्षा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के निरक्षर नागरिकों को बुनियादी पढ़ना-लिखना, अंकज्ञान, जीवन कौशल और आजीवन शिक्षा से जोड़ना है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसका महत्व
- उत्तराखंड देश का छठा पूर्णतः साक्षर राज्य बना।
- वयस्क साक्षरता अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली।
- शिक्षा, सामाजिक विकास और मानव संसाधन सशक्तीकरण की दिशा में राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।
- सरकार अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता और जीवन कौशल पर भी विशेष ध्यान देने की बात कर रही है।
चुनौती अभी बाकी
विशेषज्ञों का मानना है कि “पूर्णतः साक्षर” घोषित होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सीखने के वास्तविक स्तर, डिजिटल शिक्षा, पुस्तकालय संस्कृति और रोजगारोन्मुख कौशल को मजबूत करना है। केवल पढ़ना-लिखना जानना पर्याप्त नहीं, बल्कि नागरिकों को बदलती दुनिया के अनुरूप सक्षम बनाना भी उतना ही आवश्यक है।
