एनपीए नियंत्रण, यूसीएफ भूमि के व्यावसायिक उपयोग, सोलर रूफटॉप, डिजिटल बैंकिंग और ‘एक बैंक-एक रंग’ व्यवस्था पर महत्वपूर्ण निर्देश
देहरादून, 13 जून।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास पर सहकारिता विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहकारी बैंकों एवं सहकारी संस्थाओं को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी एवं वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय जिला सहकारी बैंकों एवं राज्य सहकारी बैंक की वेतन संरचना, मानव संसाधन प्रबंधन तथा वित्तीय व्यवस्थाओं के व्यापक अध्ययन हेतु पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति के गठन को लेकर रहा। मंत्री डॉ. रावत ने निर्देश दिए कि समिति देश के उन उत्कृष्ट राज्यों का अध्ययन करेगी जहां सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रभावी कार्य हुए हैं। समिति विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों, वित्तीय प्रबंधन, सेवा शर्तों, तकनीकी नवाचारों एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अध्ययन कर विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करेगी।
समिति में राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक, वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त निबंधक एवं अपर निबंधक स्तर के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि नाबार्ड का एक वरिष्ठ अधिकारी सलाहकार की भूमिका निभाएगा। समिति को एक माह के भीतर अपनी अनुशंसाओं सहित विस्तृत रिपोर्ट सचिव सहकारिता को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) निरंजनपुर स्थित बहुमूल्य भूमि के व्यावसायिक उपयोग एवं इसके लिए उपयुक्त संस्था नामित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंकों की जनपदवार एनपीए स्थिति की समीक्षा करते हुए डॉ. रावत ने अधिकारियों को बकाया ऋणों की वसूली हेतु प्रभावी रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सहकारी बैंकों की वित्तीय मजबूती के लिए एनपीए में कमी लाना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस संबंध में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में प्रदेशभर के जिला सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी बैंक एवं बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की एक समान पहचान विकसित करने के उद्देश्य से “एक बैंक-एक रंग” की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने सभी बैंकों एवं समितियों के लिए एक समान कलर कोड तथा ड्रेस कोड लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
प्रदेश में प्रस्तावित तीन नए जिला सहकारी बैंकों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
ऊर्जा संरक्षण एवं संस्थागत व्यय में कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंकों एवं सहकारी समितियों की भवनों पर चरणबद्ध रूप से सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। इससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. रावत ने कहा कि सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, डिजिटल ट्रांजैक्शन तथा अन्य आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही सहकारी बैंकों के लिए दीर्घकालिक व्यावसायिक रोडमैप तैयार कर उन्हें प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष बल दिया।
बैठक में सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद, मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड श्री पंकज यादव, अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती, श्री आनंद ए.डी. शुक्ल, संयुक्त निबंधक श्री नीरज बेलवाल, सुश्री रमिंद्री मंद्रवाल, प्रबंध निदेशक राज्य सहकारी बैंक श्री प्रदीप मेहरोत्रा वित्त नियंत्रक सुश्री नीलू वर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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