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WPI का नया आधार वर्ष 2022-23, भारत में पहली बार व्यापक स्तर पर लागू होगा Producer Price Index

नई दिल्ली, 2 जून 2026। भारत सरकार ने देश की मूल्य-सांख्यिकी प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पहली बार व्यापक स्तर पर Producer Price Index (PPI) की नई श्रृंखला भी लागू की जाएगी। यह निर्णय मूल्य और जीवन-यापन लागत सांख्यिकी पर तकनीकी सलाहकार समिति तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की सिफारिशों के बाद लिया गया है।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा संशोधित WPI तथा नई PPI श्रृंखला 15 जून 2026 को जारी की जाएगी। नई श्रृंखला मौजूदा 2011-12 आधारित WPI का स्थान लेगी।

क्या है सबसे बड़ा बदलाव?

सरकार अगले पांच वर्षों तक WPI और PPI दोनों को समानांतर रूप से जारी करेगी। इसके बाद WPI को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना है। यह कदम वैश्विक मानकों और International Monetary Fund की सिफारिशों के अनुरूप माना जा रहा है।

PPI उत्पादकों को मिलने वाले वास्तविक मूल्यों को मापता है, जबकि WPI मुख्यतः थोक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमतों और अंतिम उत्पाद की कीमतों के बीच संबंध को अधिक स्पष्टता से समझा जा सकेगा।

957 वस्तुओं को शामिल किया गया

नई WPI श्रृंखला में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इससे मूल्य परिवर्तन की निगरानी पहले की तुलना में अधिक व्यापक और सटीक होगी।

नई श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा को पहली बार “विद्युत” समूह में शामिल किया गया है। इससे भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को आधिकारिक मूल्य सूचकांक में स्थान मिलेगा।

ऊर्जा क्षेत्र की नई संरचना

कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को अब “प्राथमिक वस्तुओं” की श्रेणी से हटाकर “ईंधन और बिजली” समूह में रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा क्षेत्र की कीमतों का अधिक तार्किक और एकीकृत आकलन संभव होगा।

सेवाओं को भी मिलेगा स्थान

नई PPI श्रृंखला में सात प्रमुख सेवा क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

  • बैंकिंग
  • प्रतिभूति लेनदेन
  • बीमा
  • पेंशन फंड प्रबंधन
  • रेलवे
  • हवाई यात्री सेवाएं
  • दूरसंचार

यह पहली बार होगा जब सेवा क्षेत्र की कीमतों की व्यवस्थित निगरानी उत्पादक मूल्य सूचकांक के माध्यम से की जाएगी।

कार्यप्रणाली में भी बदलाव

नई श्रृंखला में भार निर्धारण के लिए सकल उत्पादन मूल्य (GVO) का उपयोग किया गया है। इससे घरेलू उत्पादन की वास्तविक आर्थिक हिस्सेदारी को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सकेगा।

साथ ही मूल्य डेटा की अनुपलब्धता की स्थिति में पुरानी “कैरी-फॉरवर्ड” पद्धति के स्थान पर “टार्गेटेड मीन इम्प्यूटेशन” तकनीक अपनाई गई है, जिसे अधिक वैज्ञानिक माना जा रहा है।

उत्तराखंड पर क्या होगा असर?

हरिद्वार, रुद्रपुर, सितारगंज और काशीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में फार्मा, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और विद्युत उपकरण उद्योग सक्रिय हैं। नई PPI श्रृंखला इन उद्योगों की वास्तविक लागत और मूल्य प्रवृत्तियों को समझने में अधिक उपयोगी साबित हो सकती है।

साथ ही राज्य में बढ़ रहे सौर और जलविद्युत निवेश को भी नई मूल्य प्रणाली में बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा।

आर्थिक महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल सांख्यिकीय संशोधन नहीं है, बल्कि भारत की बदलती अर्थव्यवस्था को मापने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकार, उद्योग जगत और Reserve Bank of India को महंगाई के शुरुआती संकेत अधिक सटीक रूप से प्राप्त हो सकेंगे, जिससे आर्थिक नीतियां और अधिक प्रभावी बनाई जा सकेंगी।

भारत का यह कदम उसे उन देशों की श्रेणी में खड़ा करता है जहां उत्पादक स्तर की मुद्रास्फीति को मापने के लिए आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सूचकांकों का उपयोग किया जाता है।


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By udaen

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