कोटद्वार। नगर निगम कोटद्वार के पार्षद सुभाष पांडे ने शहर में अतिक्रमण हटाने और संभावित विस्थापन की कार्रवाई को लेकर कहा है कि यदि सरकार और प्रशासन वास्तव में जनहित में कार्रवाई कर रहे हैं तो उसमें किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रभावित लोगों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए समान नीति अपनाई जानी चाहिए।
पार्षद सुभाष पांडे ने कहा कि पनियाली नाले के किनारे पिछले 40–50 वर्षों से रह रहे लोगों के मामले में भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इनमें कई परिवारों के पास सरकारी पट्टे भी हैं। यदि सुरक्षा या किसी अन्य प्रशासनिक कारण से उन्हें हटाना आवश्यक माना जाता है तो पहले उनके लिए उचित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाजार क्षेत्र में सिंचाई विभाग के नाले के ऊपर वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारी भी इसी शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। इनमें कई व्यापारी 60–70 वर्षों से अधिक समय से उसी स्थान पर अपना रोजगार कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी हटाने से पहले वैकल्पिक व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पार्षद ने रिफ्यूजी कॉलोनी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यहां रहने वाले परिवार आजादी के समय से बसे हुए हैं और कई परिवारों को तत्कालीन परिस्थितियों में सरकार द्वारा ही बसाया गया था। इसलिए यदि पुनर्वास या विस्थापन की कोई नीति बनाई जाती है तो इन परिवारों के अधिकारों और लंबे समय से चले आ रहे निवास को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने लकड़ी पड़ाव की जमीन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वर्षों से रहकर रोजगार करने वाले लोगों के भविष्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी कारणवश वहां से लोगों को हटाने की कार्रवाई होती है तो प्रभावित परिवारों को भी उचित पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था मिलनी चाहिए।
सुभाष पांडे ने गोखले मार्ग पर फुटपाथ के आसपास सब्जी एवं अन्य सामान बेचने वाले गरीब दुकानदारों का पक्ष लेते हुए कहा कि इनमें से अनेक परिवार अपनी छोटी-सी आजीविका से घर चला रहे हैं। इसी तरह रेहड़ी-ठेली लगाने वाले लोगों को भी केवल अतिक्रमण के नाम पर परेशान करने के बजाय उनके रोजगार और परिवार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “न्याय करना है तो भेदभाव नहीं होना चाहिए। अमीर हो या गरीब, व्यापारी हो या रेहड़ी-ठेली वाला—सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। किसी को हटाना जरूरी है तो पहले उसके पुनर्वास और आजीविका की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।”
पार्षद ने प्रशासन से मांग की कि कोटद्वार में अतिक्रमण अथवा विस्थापन से जुड़े किसी भी अभियान से पहले सर्वे कराया जाए, प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों की जांच की जाए तथा पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि विकास और शहर के नियोजन की आवश्यकता अपनी जगह है, लेकिन इसकी कीमत गरीब और लंबे समय से बसे परिवारों की आजीविका छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय पुनर्वास, आजीविका की सुरक्षा और समानता के सिद्धांत को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग को यह महसूस न हो कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों के खिलाफ की जा रही है।
