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69% रिश्वत दर: कैसे ‘एशिया का सबसे भ्रष्ट देश’ कहलाया भारत, क्या कहती हैं अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें?

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार सूचकांकों और वैश्विक सर्वेक्षणों में भारत को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी बिजनेस मैगज़ीन Forbes की 2017 की एक चर्चित रिपोर्ट में भारत को एशिया का “सबसे अधिक रिश्वत दर वाला देश” बताया गया था। यह रिपोर्ट Transparency International के “Global Corruption Barometer – Asia Pacific” सर्वे पर आधारित थी। (Forbes)

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल भारत के 69% लोगों ने माना कि उन्हें सार्वजनिक सेवाओं के लिए रिश्वत देनी पड़ी। भारत के बाद वियतनाम (65%), थाईलैंड (41%), पाकिस्तान (40%) और म्यांमार (40%) का स्थान था। (Forbes)

क्या वास्तव में भारत “सबसे भ्रष्ट” देश है?

यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। Forbes ने स्वयं भ्रष्टाचार का आकलन नहीं किया था, बल्कि उसने Transparency International के सर्वे डेटा का विश्लेषण प्रकाशित किया था। यह सर्वे “रिश्वत देने के अनुभव” पर आधारित था, न कि किसी देश की संपूर्ण प्रशासनिक या संस्थागत भ्रष्टाचार रैंकिंग पर।

यानी यह निष्कर्ष निकाला गया कि सर्वे में शामिल भारतीयों में रिश्वत देने का अनुभव सबसे अधिक था, न कि भारत दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश है।

वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में कौन से देश सबसे नीचे?

Transparency International के Corruption Perceptions Index (CPI) में पिछले कई वर्षों से सोमालिया, दक्षिण सूडान और सीरिया जैसे युद्धग्रस्त देशों को सबसे अधिक भ्रष्ट देशों में गिना जाता रहा है। यह सूचकांक 180 देशों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा के आधार पर रैंक करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इन देशों में:

  • कमजोर न्याय व्यवस्था,
  • राजनीतिक अस्थिरता,
  • गृहयुद्ध,
  • प्रशासनिक विफलता,
  • और सशस्त्र समूहों का प्रभाव

भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे देता है।

सोशल मीडिया पर पुरानी रिपोर्टें फिर वायरल

हाल के वर्षों में 2017 की Forbes रिपोर्ट को कई बार “नई रिपोर्ट” बताकर सोशल मीडिया पर साझा किया गया। फैक्ट-चेक संस्थाओं ने स्पष्ट किया कि यह पुराना डेटा है और इसे वर्तमान स्थिति के रूप में पेश करना भ्रामक है।

बाद के वर्षों में Transparency International की नई रिपोर्टों में भारत की स्थिति और आंकड़े अलग रहे हैं। 2020 के एक अन्य सर्वे में भारत की रिश्वत दर 39% बताई गई थी, हालांकि यह भी एशिया में सबसे अधिक श्रेणियों में शामिल रही।

भ्रष्टाचार: केवल रिश्वत नहीं, व्यवस्था का संकट

विशेषज्ञ मानते हैं कि भ्रष्टाचार केवल “घूस” तक सीमित नहीं है। विकसित देशों में यह लॉबिंग, कॉरपोरेट प्रभाव और नीति-निर्माण पर निजी नियंत्रण के रूप में दिखाई देता है, जबकि विकासशील देशों में यह अक्सर रोजमर्रा की सरकारी सेवाओं तक पहुँच से जुड़ा होता है।

Transparency International की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करता है और गरीब तबकों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है।

निष्कर्ष

Forbes की चर्चित रिपोर्ट ने भारत में रिश्वत की गंभीर समस्या को वैश्विक बहस का हिस्सा बनाया था, लेकिन “सबसे भ्रष्ट देश” जैसी सुर्खियाँ अक्सर अधूरी व्याख्या प्रस्तुत करती हैं। किसी भी देश में भ्रष्टाचार को समझने के लिए केवल रैंकिंग नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, न्याय व्यवस्था, राजनीतिक जवाबदेही और नागरिक अनुभव—सभी पहलुओं को साथ देखना आवश्यक है।


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By udaen

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