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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के पीएमईजीपी ने सूक्ष्म उद्यम विकास में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की, 36.33 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए, ग्रामीण उद्यमिता को मजबूती मिली

15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान सूक्ष्म उद्यमों और रोजगार के विकास को गति देते हुए लक्ष्यों को पार किया

13,554 करोड़ रुपये के बजट आवंटन का पूर्ण उपयोग करते हुए लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन किया

पीएमईजीपी की 80 प्रतिशत इकाइयां गांवों में स्थापित होने से ग्रामीण औद्योगीकरण को बड़ा बढ़ावा मिला

महिलाएं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमी पीएमईजीपी में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं

PIB Delhi

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) देश भर में उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस कार्यक्रम को खादी और ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

पीएमईजीपी योजना कृषि क्षेत्र से इतर नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को बैंक ऋण पर मार्जिन मनी (एमएम) सब्सिडी प्रदान करके सहायता करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना और विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका को बढ़ावा देना है।

15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान सशक्त प्रदर्शन

15वें वित्त आयोग के कार्यकाल (वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26) के दौरान, पीएमईजीपी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है जो देश के सूक्ष्म उद्यम परितंत्र को मजबूत करने में इसके योगदान की पुष्टि करता है।

इस योजना ने 13,554.42 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजटीय आवंटन का पूर्ण उपयोग किया और 4,03,706 सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को सुगम बनाया, जो 4,02,000 उद्यमों के लक्ष्य से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि प्रभावी कार्यान्वयन और उद्यमिता-आधारित पहलों की निरंतर मांग को दर्शाती है।

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इस कार्यक्रम ने लगभग 36.33 लाख लोगों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा किए, जिससे देश भर में आजीविका सृजन और जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला।

समावेशी विकास और ग्रामीण पहुंच

पीएमईजीपी ने महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों को लक्षित सहायता प्रदान करके समावेशी विकास को बढ़ावा देना जारी रखा है।

  • इस योजना के तहत सहायता प्राप्त कुल सूक्ष्म उद्यमों में से लगभग 40 प्रतिशत महिला लाभार्थी हैं।
  • वितरित की गई कुल मार्जिन मनी सब्सिडी का लगभग 45 प्रतिशत महिला उद्यमियों को प्रदान किया गया है, जिससे महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रोत्साहन मिला है।
  • लाभार्थियों में से लगभग 54 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं, जो सामाजिक समावेश पर योजना के मजबूत फोकस को उजागर करता है।
  • पीएमईजीपी के तहत स्थापित लगभग 80 प्रतिशत उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जो ग्रामीण औद्योगीकरण और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देते हैं।
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आत्म-निर्भरता और जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देना

15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान हासिल की गई उपलब्धियां भारत में सूक्ष्म उद्यम विकास और रोजगार सृजन के प्रमुख चालक के रूप में पीएमईजीपी की भूमिका को पुनः स्थापित करती हैं। ऋण-संबंधी सब्सिडी तक पहुंच को सुगम बनाकर और जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देकर, इस योजना ने समावेशी आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखा है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय वित्त आयोग के आगामी कार्यकाल में नवाचार, विस्तारशीलता और व्यापक पहुंच पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए पीएमईजीपी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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By udaen

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