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केंद्र और राज्य सरकारें तीन दिवसीय शिविर में सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करेंगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में चिंतन शिविर की अध्यक्षता करेंगे

शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्‍माइल ऐप्स सहित कई प्रमुख ऐप्स लॉन्च किए जाएंगे

प्रविष्टि तिथि: 23 APR 2026 2:44PM by PIB Delhi

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब– विकसित भारत @2047” विषय-वस्‍तु पर तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। यह विषय-वस्‍तु अमृत काल और विकसित भारत के विजन के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिए पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्‍माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्‍टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्‍यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।

प्रत्येक समूह कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा नवोन्‍मेषी समाधानों को साझा करेगा। समूह निर्धारित समयसीमाओं के साथ अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है ताकि चर्चाएं संरचित, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख रहें।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्‍मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। समापन दिवस पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें प्रमुख परिणामों और भविष्‍य की रणनीति को साझा किया जाएगा।


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By udaen

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