इंदौर की पद्मश्री जनक पलटा का ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल बना मिसाल, “कचरा” शब्द को ही किया जीवन से बाहर
इंदौर/विशेष संवाददाता:
मध्यप्रदेश के इंदौर के पास रहने वाली जनक पलटा मॅकगिलिगन ने अपने जीवन से एक ऐसी पर्यावरणीय पहल को साकार किया है, जो आज के बढ़ते कचरा संकट के बीच एक व्यवहारिक समाधान के रूप में उभर रही है। उनका “जीरो वेस्ट” जीवन मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े सामाजिक परिवर्तन की नींव बन सकते हैं।
हर वर्ष मनाया जाने वाला International Day of Zero Waste इस बार एक बार फिर उपभोग और अपशिष्ट के बीच संतुलन पर विचार करने का अवसर लेकर आया है। ऐसे में जनक पलटा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि “कचरा” दरअसल हमारी जीवनशैली और सोच का परिणाम है, न कि कोई अनिवार्यता।
पूरी तरह ‘जीरो वेस्ट’ जीवनशैली
जनक पलटा के घर में किसी भी प्रकार का कचरा उत्पन्न नहीं होता। जैविक अपशिष्ट को कम्पोस्ट में बदला जाता है, पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है और प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। ऊर्जा के लिए सौर साधनों का उपयोग और स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
नीति और समाज के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मॉडल शहरी स्थानीय निकायों के लिए भी एक दिशा तय कर सकते हैं। विकेन्द्रीकृत कचरा प्रबंधन, घर-स्तर पर कम्पोस्टिंग और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देकर नगरों में कचरा संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बदलाव की शुरुआत व्यक्ति से
जहाँ एक ओर देश के बड़े शहर कचरे के पहाड़ और प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं जनक पलटा का जीवन यह संदेश देता है कि समाधान केवल नीतियों में नहीं, बल्कि आम नागरिक की जीवनशैली में भी निहित है।
निष्कर्ष:
जनक पलटा मॅकगिलिगन का ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति और जागरूकता हो, तो “कचरा मुक्त” जीवन कोई असंभव लक्ष्य नहीं, बल्कि एक साकार हकीकत है।
