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बिहार के किशनगंज जिले का लड़का हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने पिता से अलग हुआ था, उसे उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर किया गया।

आयोग ने इस मामले में हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और बिहार के किशनगंज के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

PIB Delhi

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग- एनएचआरसी ने बिहार के किशनगंज जिले के एक 15 वर्षीय लड़के के हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने पिता से अलग होने के बाद महीनों तक बंधुआ मजदूरी कराए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, लड़का रेलवे स्टेशन पर पानी लेने ट्रेन से उतरा लेकिन भीड़ के कारण नहीं चढ़ सका। ट्रेन छूटने के बाद आठ महीने तक उसे बंधुआ मजदूरी की पीड़ा सहनी पड़ी। आखिरकार, कटी हुई कोहनी के साथ वह किसी तरह अपने घर वापस पहुंचा।

समाचार रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि उसे अधिकारियों द्वारा अभी तक केंद्रीय बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना-2021 के तहत बंधुआ मजदूरी मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है जो पीड़ित के लिए पुनर्वास और मुआवजे के लिए अनिवार्य दस्तावेज है।

आयोग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के तथ्य सत्य हैं, तो यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है। मानवाधिकार आयोग ने इस सिलसिले में हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक तथा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और बिहार के किशनगंज के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर उनसे दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने अधिकारियों को यह भी सूचित करने का निर्देश दिया कि पीड़ित को कोई मुआवजा और दिव्यांग व्यक्ति अधिनियम, 2016 के लाभ के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है या नहीं।

12 जनवरी 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन छूटने के बाद लड़का दो दिन तक रेलवे स्टेशन पर रुका रहा। इसके बाद एक व्यक्ति उसे नौकरी दिलाने के बहाने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में ले जाकर सुबह से शाम तक मवेशी चराने और चारा काटने का काम करवाता रहा। उसे लगातार शारीरिक यातनाएं दी गईं। पीड़ित ने इस गुलामी से निकल भागने की असफल कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया और उसकी पिटाई की गई। समाचार रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी दौरान चारा काटने की मशीन में पीड़ित का बायां हाथ फंसने से कोहनी से कट गया। मालिक ने उसका इलाज कराए बिना सड़क पर छोड़ दिया।

इसके बाद किसी अज्ञात व्यक्ति उसे हरियाणा के नूह जिले के एक अस्पताल में पहुंचा दिया, जहां से पुराने मालिक के हाथों दोबारा पकड़े जाने के डर से वह भाग खड़ा हुआ और तीन किलोमीटर से अधिक नंगे पैर चलता रहा। तभी दो सरकारी शिक्षकों की उस पर निगाह पड़ी और मामले की सूचना हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित राजकीय रेलवे पुलिस -जीआरपी को दी गई। अंततः वह लड़का अगस्त 2025 में अपने घर लौट सका ।


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By udaen

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