उत्तराखंड: बद्रीनाथ धाम में तप्त कुंड व जल धाराओं के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक टीम का निरीक्षण
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर बद्रीनाथ धाम में तप्त कुंड सहित गर्म व ठंडी जल धाराओं के अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम धाम में अध्ययन कर रही है।
SHABD,Dehradun, January 13,
उत्तराखंड: बद्रीनाथ धाम में तप्त कुंड व जल धाराओं के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक टीम का निरीक्षण
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर बद्रीनाथ धाम में तप्त कुंड सहित गर्म व ठंडी जल धाराओं के अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम धाम में अध्ययन कर रही है। उसकी रिपोर्ट के बाद ही बद्रीनाथ महायोजना के फेज-3 के कार्य होंगे। बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत अलकनंदा रिवर फ्रंट द्वितीय चरण के कार्य मंदिर के ठीक नीचे तत्पकुंड के पास कराए जा रहे हैं। यहां पर गर्म और ठंडी जल धाराएं है। इन जल धाराओं को बचाने के लिए पीएमओ के निर्देश पर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई है। इसके लिए भारतीय रिमोट सेंसिंग इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत की जांच में जुटे हैं। बदरीनाथ मंदिर के नीचे पौराणिक तप्तकुंड व नारद कुंड के पास रिवर फ्रंट के कार्यों के दौरान छेड़छाड़ से गर्मपानी का स्रोत अपना मुहाना न बदले और बदरीनाथ मंदिर को अलकनंदा के कटाव से खतरा पैदा न हो इसके लिए स्थानीय नागरिकों की शंका को देखते हुए पीएमओ ने इस क्षेत्र में रिवर फ्रंट सहित अन्य कार्यों पर पुनर्विचार के निर्देश देते हुए पिछले साल अक्टूबर में रिवर फ्रंट के कार्य रोक दिए थे। पौराणिक स्रोतों की सुरक्षा के लिए आईआईटी रुड़की, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून और भारतीय रिमोट सेंसिंग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की टीम को जिम्मा सौंपा गया है। बदरीनाथ महायोजना के निर्माण कार्यों का जिम्मा संभाल रहे लोक निर्माण विभाग की प्रोजेक्ट इंपलीमेंट यूनिट के अधिशासी अभियंता योगेश मनराल ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम मंदिर के आसपास के पूरे क्षेत्र में भी जमीन का अध्ययन करेगी, ताकि जमीन की गहराइयों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
बाइट 1- गौरव कुमार, जिलाधिकारी, चमोली
बाइट 2- योगेश मनराल, अधिशासी अभियंता, प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट, पीडब्ल्यूडी
