लोक अदालत और सामान्य न्यायालय (Court) के बीच का अंतर
| बिंदु | लोक अदालत | सामान्य न्यायालय |
|---|---|---|
| प्रकृति | वैकल्पिक विवाद निपटारा (Alternative Dispute Resolution) | विधिक/न्यायिक प्रक्रिया द्वारा विवाद निपटारा |
| नियंत्रण | Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत | संविधान और दंड/दीवानी प्रक्रिया संहिता आदि कानूनों के तहत |
| फैसले का आधार | दोनों पक्षों की आपसी सहमति | न्यायाधीश द्वारा कानून और साक्ष्य के आधार पर |
| खर्चा | निःशुल्क या बेहद कम | कोर्ट फीस और वकील की फीस लगती है |
| समय | तेज़, एक ही दिन में भी निपटारा संभव | लंबी प्रक्रिया, कई साल लग सकते हैं |
| अपील का अधिकार | लोक अदालत के फैसले पर अपील नहीं | न्यायालय के फैसले पर अपील संभव |
| मामलों की प्रकृति | केवल आपसी सहमति वाले और छोटे/सिविल/कंपाउंडेबल आपराधिक मामले | सभी तरह के सिविल और आपराधिक मामले |
| उदाहरण | बैंक लोन विवाद, बिजली बिल, दुर्घटना मुआवज़ा, पारिवारिक विवाद | हत्या, डकैती, संवैधानिक मुद्दे, बड़े जटिल केस |
👉 संक्षेप में:
- लोक अदालत = समझौते और सहमति से तेज़ न्याय
- न्यायालय = कानून और साक्ष्य पर आधारित औपचारिक न्याय
