Spread the love


🏛️ 1. मध्यस्थता अधिनियम, 2023 – परिचय

यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution – ADR) को कानूनी स्वरूप देने और न्याय प्रणाली पर बोझ घटाने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह 14 सितंबर 2023 को लागू हुआ।

उद्देश्य:

  • मुकदमे से पहले विवादों का समाधान
  • समय, पैसा और संसाधनों की बचत
  • पारंपरिक पंचायत, ग्राम सभा, NGOs और संस्थागत ढांचे को वैध समर्थन

📘 2. मुख्य धाराएँ एवं हिंदी अनुवाद (चयनित प्रमुख प्रावधान)

धाराविषयसंक्षिप्त हिंदी व्याख्या
धारा 2परिभाषाएँ“मध्यस्थता”, “पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता”, “समझौता”, आदि को परिभाषित करता है।
धारा 3पूर्व-मुकदमा मध्यस्थताकोई भी व्यक्ति अदालत में केस डालने से पहले अनिवार्य रूप से मध्यस्थता का प्रयास करेगा।
धारा 6ऑनलाइन मध्यस्थताटेक्नोलॉजी के माध्यम से वीडियो कॉल, ऑनलाइन दस्तावेज़ आदि से विवाद हल किए जा सकते हैं।
धारा 7मध्यस्थता योग्य विवादसभी सिविल और वाणिज्यिक विवाद, जब तक कि कानून द्वारा मना न हो।
धारा 12मध्यस्थ की नियुक्तिस्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रशिक्षित व्यक्ति को मध्यस्थ नियुक्त किया जाएगा।
धारा 19मध्यस्थता समझौते की वैधतामध्यस्थता में हुआ समझौता कोर्ट की डिक्री के समान प्रभावी होगा।
धारा 32मध्यस्थता परिषद भारतयह एक राष्ट्रीय निकाय होगा जो सभी मध्यस्थता संस्थाओं का नियमन करेगा।

⚖️ 3. Mediation Council of India – मध्यस्थता परिषद भारत

गठन: भारत सरकार द्वारा
कार्य:

  • मध्यस्थों का रजिस्ट्रेशन
  • ट्रेनिंग और आचार संहिता
  • संस्थागत मध्यस्थता का प्रमाणन
  • मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करना
  • तकनीकी प्लेटफॉर्म का विकास (e-Mediation)

🧩 4. मध्यस्थता का प्रयोग कैसे करें (कोर्ट से पहले)

  1. विवाद उत्पन्न होने पर – मध्यस्थता समझौते या पार्टियों की सहमति से प्रक्रिया शुरू होती है।
  2. मध्यस्थ नियुक्त करना – पक्ष एक योग्य मध्यस्थ चुनते हैं।
  3. सुनवाई/वार्ता – गैर-औपचारिक वातावरण में दोनों पक्ष बातचीत करते हैं।
  4. समझौता पत्र तैयार – यदि समाधान होता है, तो उसे लिखित में लिया जाता है।
  5. अदालत में जमा करें – यह समझौता कोर्ट डिक्री जैसा ही लागू होता है।

🌱 5. पंचायत, NGO और समुदाय में उपयोग

  • पंचायत स्तर: पंचायत सदस्य या पारंपरिक बुजुर्ग प्रशिक्षित मध्यस्थ बन सकते हैं।
  • NGO: सामाजिक विवादों, भूमि, मजदूरी, महिला-पुरुष अधिकार जैसे मामलों में मध्यस्थता लागू।
  • TI Projects, SHG Models: सेक्स वर्कर, महिला मंडल, किसान संगठन जैसे संगठनों में भी प्रयोग योग्य।

उदाहरण:

  • ग्राम सभा की बैठक में भूमि विवाद को कोर्ट में ले जाने की बजाय “पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता” द्वारा सुलझाना।
  • एक NGO द्वारा “मध्यस्थता केंद्र” की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में।



Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *