मध्य प्रदेश की सीहोर निवासी कविता वर्मा की आर्थिक सशक्तिकरण यात्रा
PIB Delhi
समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद लोगों को स्थायी आजीविका शुरू करने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में अहम भूमिका निभा सकती है। सही मदद से लाभार्थी अपने उद्यमशीलता की आकांक्षाओं को सही मायने में कमाई करने वाले कामों में बदल सकते हैं।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की रहने वाली श्रीमती कविता वर्मा स्थायी आजीविका शुरू करना चाहती थीं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में योगदान देना चाहती थीं। हालाँकि, पैसे की कमी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करना उनके लिए एक चुनौती थी।
साल 2024 में, एनएसएफडीसी रीफाइनेंस स्कीम के तहत, श्रीमती वर्मा को आटा चक्की लगाने के लिए मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक, सीहोर (मंडी ब्रांच) से 3,42,000 रुपये की आर्थिक मदद मिली।
इस आर्थिक मदद से कविता ने सफलतापूर्वक आटा चक्की का व्यवसाय शुरू किया। इस व्यवसाय से उन्हें कमाई का एक स्थायी जरिया मिला और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

आज, श्रीमती कविता वर्मा सफलतापूर्वक अपनी आटा मिल का व्यवसाय चला रही हैं। उनका सफ़र यह दिखाता है कि समय पर मिली आर्थिक मदद कैसे स्वरोज़गार को बढ़ावा दे सकती है, परिवार की आजीविका को मज़बूत कर सकती है और लाभार्थियों को आर्थिक रूप से ज़्यादा आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकती है।
कविता वर्मा का अनुभव दिखाता है कि एनएसएफडीसी रीफ़ाइनेंस योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से लाभार्थी कैसे सफल व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और एक ज़्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य बना सकते हैं।
