
कोटद्वार, 6 अप्रैल | Udaen News Network
कोटद्वार प्रेस क्लब द्वारा आज रविवार को आयोजित स्मारिका विमोचन कार्यक्रम “उत्तराखंड का समग्र विकास एवं राष्ट्रीय तीर्थ कण्वाश्रम” विषय पर केंद्रित रहा। यह आयोजन न केवल पत्रकारिता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्रीय विकास की दिशा में संवाद की आवश्यकता को भी उजागर कर गया।



मुख्य अतिथियों ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण एवं लैंसडौन विधायक महंत दलीप सिंह रावत के कर-कमलों द्वारा हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में आकाशवाणी के पूर्व निदेशक चक्रधर कंडवाल ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।


इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश पथरी को कोटद्वार प्रेस क्लब की ओर से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान जनसरोकार से जुड़ी निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया। पूर्व अध्यक्ष असीष बालोदी और पूर्व सचिव राजेश सेमवाल एवं अजय खंतवाल ने अतिथियों का माला और ब्लेजर लगा कर स्वागत किया।

प्रेरणादायक विचारों से सजी मंचीय प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में डॉ. पद्मेश बुढ़ाकोटी और अंशु डंगवाल ने कण्वाश्रम की ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्ता पर अपने ओजस्वी विचार रखे। दोनों वक्ताओं ने कण्वाश्रम को केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रकृति के सह-अस्तित्व का प्रतीक बताया।
लैंसडौन विधायक महंत दलीप सिंह रावत और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने भी अपने सारगर्भित संवाद से श्रोताओं को प्रभावित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कण्वाश्रम का आज तक समुचित विकास न हो पाना सरकारी अदूरदर्शिता और जनभागीदारी की कमी का परिणाम है। दोनों जनप्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास और नीति-निर्धारण की आवश्यकता जताई।
संचालन और सहभागिता
कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटद्वार प्रेस क्लब अध्यक्ष चंद्रमोहन शुक्ला ने की, जबकि मंच का संचालन वरिष्ठ पत्रकार विमल ध्यानी द्वारा प्रभावशाली शैली में किया गया।
प्रेस क्लब के सचिव सुभाष नौटियाल, कोषाध्यक्ष दिनेश पाल गुसाईं, सह सचिव चंद्रजीत, उपाध्यक्ष चंद्रेश लखेड़ा, और अन्य सदस्य आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल रहे।
संवाद की कमी ने खींचा ध्यान
जहाँ आयोजन का विषय अत्यंत सारगर्भित और सामयिक था, वहीं जन संवाद और व्यापक जनभागीदारी की अनुपस्थिति महसूस की गई। जटिल विषय के कारण वक्तागण और अतिथियों का विषय से भटकना स्पष्ट तौर पर दिख रहा था ,कौन जवाबदेह और जिम्मेदार हो अब तक की असफलता के लिए ,तीन बार कर्णवश्रम के विकास का शिलान्यास कागजों तक सीमित रहा है और सिर्फ आंदोलन की राह देख रहा है ,पर आज का सफल आयोजन यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में यदि इस आंदोलन को आगे बढ़ाना है तो सामूहिक सहभागिता और सतत विमर्श आवश्यक होगा।
आगे की राह:
- संवादात्मक संगोष्ठियों की श्रृंखला
- जनजागरण और जनमत संग्रह
- शोध दस्तावेज और कण्वाश्रम पर व्यापक प्रचार
- सरकार को ज्ञापन और ठोस कार्ययोजना
निष्कर्ष:
कोटद्वार प्रेस क्लब का यह प्रयास एक सराहनीय शुरुआत है, परंतु यदि कण्वाश्रम को राष्ट्रीय तीर्थ घोषित करवाना है और उत्तराखंड के समग्र विकास की सोच को ज़मीनी स्तर पर उतारना है, तो पत्रकारिता को जन संवाद, युवाओं को भागीदारी, और समाज को नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।
