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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय

azadi ka amrit mahotsav

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने वार्षिक प्रकाशन “ऊर्जा सांख्यिकी भारत 2025” जारी किया है। यह प्रकाशन मंत्रालय की वेबसाइट www.mospi.gov.in पर उपलब्ध है।

इस प्रकाशन में भारत की सभी ऊर्जा वस्तुओं (जैसे कोयला, लिग्नाइट, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, आदि) के भंडार, क्षमता, उत्पादन, खपत और आयात/निर्यात के संदर्भ में विविध महत्वपूर्ण जानकारी युक्त एकीकृत डेटासेट शामिल है। प्रकाशन में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विभिन्न तालिकाएं (जैसे ऊर्जा संतुलन), ग्राफ़ (जैसे सैंकी आरेख) और सतत ऊर्जा संकेतक भी शामिल हैं।

वर्तमान प्रकाशन में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए), 2012 प्रारूप के अनुसार ऊर्जा खाते पर एक नया अध्याय शामिल है। यह अध्याय वित्त वर्ष 2022-23 और वित्त वर्ष 2023-24 के लिए परिसंपत्ति खाते और भौतिक आपूर्ति और उपयोग तालिका प्रदान करता है।

मुख्य विशेषताऐं :

वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान, भारत ने 2047 तक विकसित भारत बनने के स्वप्न को साकार करने के लिए वैश्विक महामारी के आघात पर नियंत्रण पाकर ऊर्जा आपूर्ति और खपत दोनों में स्थिर और स्वस्थ वृद्धि का अनुभव किया है ।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान स्वस्थ विस्तार दर्शाया है, जिसमें कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टीपीईएस) में पिछले वर्ष की तुलना में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 9,03,158 केटीओई (किलो टन तेल समतुल्य) पर पहुंच गई।
  • भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावना है जो 31 मार्च 2024 तक 21,09,655 मेगावाट है। पवन ऊर्जा से ऊर्जा उत्पादन की क्षमता में सबसे अधिक 11,63,856 मेगावाट (लगभग 55 प्रतिशत) की हिस्सेदारी है, इसके बाद सौर ऊर्जा (7,48,990 मेगावाट) और बड़ी पनबिजली (1,33,410) का स्थान आता है। अक्षय ऊर्जा उत्पादन की आधी से ज़्यादा क्षमता भारत के चार राज्यों में केंद्रित है जिनमें राजस्थान (20.3 प्रतिशत), महाराष्ट्र (11.8 प्रतिशत), गुजरात (10.5 प्रतिशत) और कर्नाटक (9.8 प्रतिशत) शामिल है।
  • नवीकरणीय संसाधनों से बिजली उत्पादन (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता सहित) की स्थापित क्षमता में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2015 को 81,593 मेगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2024 को 1,98,213 मेगावाट हो गई है, जो पिछले वर्षों में 10.36 प्रतिशत की सीएजीआर है।
  • नवीकरणीय संसाधनों (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता दोनों को मिलाकर) से बिजली का सकल उत्पादन भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान उत्पादित 2,05,608 जीडब्ल्यूएच बिजली की मात्रा से, यह वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बढ़कर 3,70,320 जीडब्ल्यूएच हो गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में 6.76 प्रतिशत की सीएजीआर है।
  • भारत ने पिछले कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है । यह वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 14,682 मेगा जूल/व्यक्ति से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 18,410 मेगा जूल/व्यक्ति हो गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में 2.55 प्रतिशत की सीएजीआर है।
  • पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाले नुकसान को कम करके बिजली के उपयोग में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाला नुकसान प्रतिशत जो वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान लगभग 23 प्रतिशत था, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान घटकर लगभग 17 प्रतिशत रह गया है।
  • सभी प्रमुख ऊर्जा उपभोग क्षेत्रों में से, उद्योग क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान अधिकतम विस्तार देखा है। उद्योग क्षेत्र के विरुद्ध खपत वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 2,42,418 केटीओई से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 3,11,822 केटीओई  हो गई है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा, आवासीय, कृषि और वानिकी जैसे अन्य सभी क्षेत्रों ने भी इस अवधि में लगातार वृद्धि दर्ज की है।

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By udaen

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