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संसद प्रश्न: स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण

एसबीएम (जी) के तहत 2014-15 से 2022-23 तक केंद्र स्तर पर आवंटित और उपयोग की गई सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) निधि निम्नानुसार है: –

  रुपये लाख में
वर्षआवंटनउपयोग किया गया
2014-159732.839732.55
2015-1616050.0016050.00
2016-1723485.5823485.57
2017-1832016.1832016.18
2018-1912000.0011404.23
2019-2012873.003800.79
2020-213000.001613.65
2021-222055.001604.46
2022-234516.004485.10

स्वच्छता, राज्य का विषय होने के कारण, घटक-वार निधि राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को जारी नहीं की जाती है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के पास IEC सहित विभिन्न घटकों के लिए अपने धन को आवंटित करने और उपयोग करने की लचीलापन है। हालांकि, SBM(G) चरण II दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र IEC उद्देश्यों के लिए कुल व्यय का केवल 3% तक ही उपयोग कर सकते हैं। तदनुसार, राज्यों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 से 2022-23 तक IEC के लिए निधियों का उपयोग राज्यवार और वर्षवार नीचे दिया गया है।

एसबीएम (जी) चरण II दिशानिर्देशों के तहत, ग्राम पंचायतों को एसबीएम (जी) चरण II कार्यक्रम के सभी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर घटकों की योजना और कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल होना है। ग्राम पंचायतों को आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एसएचजी सदस्यों, गैर सरकारी संगठनों आदि के साथ सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए विचार किया जाता है, जिसमें मांग सृजन और सुविधाओं के निरंतर उपयोग, क्षमता निर्माण, निर्माण में सहायता और स्वच्छता सुविधाओं के निरंतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिगरिंग शामिल है। ग्राम जल और स्वच्छता समितियां (VWSCs) कार्यक्रम के संचालन, कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण के लिए ग्राम कार्य योजना तैयार करने के लिए जीपी की एक उप-समिति के रूप में गठित की जाती हैं। हालांकि, वीडब्ल्यूएससी की संरचना और कार्य राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जाना है। राज्य/जिला स्तर पर तैयार की गई योजना के अनुसार वीडब्ल्यूएससी सदस्यों, पीआरआई सदस्यों और अन्य क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

ग्रेवाटर प्रबंधन, जहां भी संभव हो, सोख गड्ढों के माध्यम से या अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाबों, निर्मित आर्द्रभूमि, विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों (डीईडब्ल्यूएटीएस) इत्यादि जैसी अन्य तकनीकों के माध्यम से किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अनुपचारित अपशिष्ट जल जल निकायों में मिश्रित न हो। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है, यानी घरेलू और सभी सार्वजनिक स्थानों (प्राथमिक विद्यालयों, पंचायत घर और आंगनवाड़ी केंद्र सहित) के लिए जैविक रूप से विघटित और गैर-जैविक रूप से विघटित प्रणाली। एसडब्लूएम प्रणाली में एसडब्लूएम का संग्रह, परिवहन, पृथक्करण, भंडारण और प्रबंधन शामिल है। जहां भी आवश्यक हो, नजदीकी शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)/फेकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) सुविधाओं में सह-उपचार के माध्यम से या आवश्यकतानुसार ट्रेंचिंग या एफएसएम प्लांट की स्थापना के माध्यम से फेकल स्लज प्रबंधन (एफएसएम)। ब्लॉक/जिला स्तर पर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्लूएमयू) की स्थापना के लिए प्रति ब्लॉक 16 लाख रुपये का प्रावधान है।


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By udaen

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