श्रद्धालु देर शाम तक भजनों की प्रस्तुतियों पर झूमते रहे।
श्री सिद्धबली बाबा महोत्सव का दूसरा दिन गढ़वाली भजन संध्या संगीता ढौंडियाल और रजनीकांत सेमवाल के नाम रहा। टीम ने एक से बढ़कर एक भक्ति रचनाओं की प्रस्तुति देकर सिद्धबली धाम का माहल भक्तिमय किया। सैकड़ों की तादाद में पहुंचे श्रद्धालु देर शाम तक भजनों की प्रस्तुतियों पर झूमते रहे।
शनिवार को मंदिर परिसर में श्री सिद्धबली मंदिर समिति की ओर से आयोजित भजन संध्या में संगीता ढौंडियाल और रजनीकांत सेमवाल के दल ने भजनों के माध्यम से सिद्धबली बाब का गुणगान किया। उन्होंने जौ जस देई, राजि खुशी राखी मेरा सिद्धबली, नंदा राजजात पर आधारित झांकी के साथ तेरी डोली सजीगे, देवी ज्वालपा देवी तू दैंणी होई जै,मधुवन मां मुरुलि बजीगे,मेरा भोले बाबा कैलाश मां नाचण लगी गे , देवी कुंजापुरी मैया दैणी होई अंत में लोगों के आग्रह पर संगीता ने अपना प्रसिद्ध गढ़वाली गीत ढोल दमों बजीगेना, दगड्डा की बराती मां.. सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
भजन गायक रजनीकांत सेमवाल ने तेरा झलसा निराला मां.., जै जै गंगे मैया.., भजले शिव का नाम.., माता वैष्णो की महिमा.., अपथै सजे दी मां.. आदि भजनों की प्रस्तुति दी। गायक रवि गुसाईं के भजन मेरा कुटुम परिवार रखी राजिखुशी मां.. आदि भजनों की प्रस्तुति दी।
