2011 में गर्जिया में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू अभियान में निभाई थी अहम भूमिका, बाघ के मुंह से शव निकालने में भी दिखाई थी बहादुरी

रामनगर। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ मादा हथिनी सोनाकली का लगभग 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 17 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:45 बजे उसने अंतिम सांस ली। वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सोनाकली को 18 अक्टूबर को वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सलामी देकर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अनुसार, सोनाकली उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रसित थी। उसे 23 जनवरी 2018 को विधिवत सेवानिवृत्त कर दिया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद उससे कोई राजकीय कार्य नहीं लिया जाता था। उसकी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नियमित देखभाल, रखरखाव और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने के लिए व्यायाम संबंधी गतिविधियां कराई जाती थीं।
हथिनी के निधन की सूचना मिलने पर वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्साधिकारी ने उसके शव का निरीक्षण किया। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत वन कर्मियों ने उसे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
गर्जिया में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू में निभाई थी अहम भूमिका
सोनाकली का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में आगमन वर्ष 1997 में हुआ था। उसने 1997 से 2002 तक ढिकाला रेंज, 2002 से 2016 तक हल्दूपड़ाव और कालागढ़ क्षेत्र तथा 2016 से अपनी सेवानिवृत्ति तक ढिकाला रेंज में सेवाएं दीं।
अपने सेवाकाल के दौरान उसने बाघों के रेस्क्यू अभियानों और वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2011 में गर्जिया क्षेत्र में आदमखोर बाघ को पकड़ने के अभियान में उसकी भूमिका उल्लेखनीय रही।
बाघ के मुंह से शव निकालने में दिखाई थी बहादुरी
सोनाकली के साहस की एक महत्वपूर्ण घटना वर्ष 2012 की है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अनुसार, सर्पदुली रेंज में बाघ के हमले में दीवानी राम की मृत्यु के बाद सोनाकली ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बाघ के मुंह से उनका शव निकालकर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2023 में सर्पदुली क्षेत्र में चलाए गए बाघ रेस्क्यू अभियान में भी उसने उल्लेखनीय योगदान दिया। वन विभाग के मुताबिक, बाघ रेस्क्यू अभियानों और जंगलों में गश्त के दौरान कई मौकों पर सोनाकली ने महावतों और चारा काटने वाले श्रमिकों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाई।
कॉर्बेट के लिए अपूरणीय क्षति
शांत और सरल स्वभाव वाली सोनाकली ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सेवाओं में बिताया। उसका जीवन वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने में प्रशिक्षित हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।
उसके निधन से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने एक ऐसी सहयोगी को खो दिया, जिसने दशकों तक जंगल की कठिन परिस्थितियों में वन कर्मियों का साथ दिया। वन्यजीव संरक्षण और बाघ रेस्क्यू अभियानों में उसका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
इस अवसर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की उपनिदेशक सुश्री पंडित शिरीन संजय (आईएफएस), पार्क वार्डन बिंदरपाल, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा, सर्पदुली के वन क्षेत्राधिकारी संजय पांडे, ढिकाला के वन क्षेत्राधिकारी रमेश ध्यानी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
