Great Reset और Agenda 2030 दो अलग-अलग पहल हैं, लेकिन दोनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, तकनीक और सामाजिक विकास से जुड़े बदलावों की चर्चा होती है।
1. Great Reset — विश्व आर्थिक मंच की पहल
(WEF) ने जून 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान The Great Reset पहल शुरू की थी।
इसके प्रमुख विचार थे:
- आर्थिक व्यवस्था में बदलाव: महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को नए सिरे से विकसित करना।
- पूंजीवाद में सुधार: कंपनियों की जिम्मेदारी केवल शेयरधारकों तक सीमित न रखकर कर्मचारियों, समाज और पर्यावरण तक बढ़ाना।
- हरित अर्थव्यवस्था: स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना।
- डिजिटल तकनीक: डिजिटल सेवाओं, स्वचालन और तकनीकी नवाचार का विस्तार।
- सामाजिक समानता: आर्थिक असमानता और सामाजिक समस्याओं को कम करने के उपाय।
विवाद क्यों है?
आलोचकों को चिंता है कि वैश्विक आर्थिक संस्थाओं और बड़ी कंपनियों के प्रभाव से सरकारों की नीतियों, नागरिकों की निजता और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
हालाँकि, यह दावा कि Great Reset के तहत दुनिया की आबादी को नियंत्रित करने, लोगों की निजी संपत्ति समाप्त करने या एक विश्व सरकार स्थापित करने की कोई गुप्त, सर्वमान्य योजना लागू की जा रही है, इसके समर्थन में विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
आधिकारिक जानकारी:
2. Agenda 2030 — संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य
ने सितंबर 2015 में सतत विकास के लिए Agenda 2030 अपनाया था।
इसमें 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) हैं, जिन्हें 2030 तक हासिल करने का प्रयास किया जाना है।
इनमें शामिल हैं:
- गरीबी समाप्त करना।
- भुखमरी समाप्त करना।
- अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
- लैंगिक समानता।
- स्वच्छ जल और स्वच्छता।
- सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा।
- सम्मानजनक रोजगार और आर्थिक विकास।
- उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा।
- असमानताओं को कम करना।
- टिकाऊ शहर और समुदाय।
- जिम्मेदार उत्पादन और उपभोग।
- जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई।
- समुद्री जीवन का संरक्षण।
- स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।
- शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएँ।
- लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वैश्विक साझेदारी।
आधिकारिक दस्तावेज:
3. दोनों में क्या अंतर है?
| विषय | Great Reset | Agenda 2030 |
|---|---|---|
| प्रमुख संस्था | विश्व आर्थिक मंच | संयुक्त राष्ट्र |
| शुरुआत | 2020 | 2015 |
| मुख्य उद्देश्य | महामारी के बाद आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था पर पुनर्विचार | सतत विकास के 17 लक्ष्य हासिल करना |
| प्रमुख क्षेत्र | पूंजीवाद, कारोबार, तकनीक और अर्थव्यवस्था | गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और समानता |
| स्वरूप | विचार एवं नीतिगत चर्चा की पहल | सदस्य देशों द्वारा अपनाया गया वैश्विक विकास एजेंडा |
| समयसीमा | कोई एक निर्धारित वैश्विक कार्यान्वयन समयसीमा नहीं | वर्ष 2030 |
4. क्या इन पहलों का आम नागरिकों पर प्रभाव पड़ सकता है?
हाँ, इनके अंतर्गत प्रस्तावित या संबंधित नीतियाँ आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि अलग-अलग देश कौन-सी नीतियाँ अपनाते हैं और उन्हें किस तरह लागू करते हैं।
भारत और उत्तराखंड के संदर्भ में चार सवाल महत्त्वपूर्ण हैं:
- डिजिटल अर्थव्यवस्था: डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं से सुविधा बढ़ सकती है, लेकिन निजता और डिजिटल निगरानी से संबंधित प्रश्न भी उठते हैं।
- ऊर्जा और पर्यावरण: स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार रोजगार और प्रदूषण दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसकी लागत और लाभों का वितरण भी महत्त्वपूर्ण है।
- कृषि और खाद्य व्यवस्था: सतत कृषि के नाम पर लागू नीतियों का किसानों, बीजों की विविधता और पारंपरिक कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता: आर्थिक नीतियों से भूमि, आवास, रोजगार और छोटे कारोबारों पर क्या असर पड़ता है? इसका आकलन वास्तविक कानूनों और नीतियों के आधार पर होना चाहिए।
5. सबसे महत्त्वपूर्ण बात: क्या ये एक ही वैश्विक योजना के हिस्से हैं?
दोनों पहलों में सतत विकास, आर्थिक बदलाव और पर्यावरण जैसे कुछ समान विषय हैं। लेकिन केवल इन समानताओं से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि दोनों किसी एक गुप्त योजना का हिस्सा हैं।
इनकी आलोचनात्मक जाँच करते समय तीन बातों को अलग रखना चाहिए:
- दस्तावेजी तथ्य: संस्थाओं ने वास्तव में क्या प्रस्तावित किया है?
- नीतिगत प्रभाव: इन प्रस्तावों से नागरिकों, किसानों, श्रमिकों और छोटे कारोबारों पर क्या असर पड़ सकता है?
- षड्यंत्र संबंधी दावे: क्या किसी कथित गुप्त योजना के समर्थन में स्वतंत्र और सत्यापन योग्य प्रमाण मौजूद हैं?
लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से मूल प्रश्न यह है: वैश्विक संस्थाओं और बड़ी कंपनियों द्वारा प्रस्तावित नीतियों पर निर्णय कौन लेता है, जवाबदेही किसकी होती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?
यदि आप इस विषय की गहराई से पड़ताल करना चाहते हैं, तो अगला कदम इन तीन विषयों की तथ्य-आधारित जाँच हो सकता है:
