
कोटद्वार। नगर निगम कोटद्वार में प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण केंद्र (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट) को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। उत्तराखंड के पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर वर्तमान में प्रस्तावित स्थल पर कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित करने का विरोध किया है और इसके लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
9 जून 2026 को लिखे गए पत्र में नेगी ने कहा है कि नगर निगम कण्वनगरी, कोटद्वार के लिए चिन्हित भूमि घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के बेहद निकट स्थित है। उन्होंने तर्क दिया कि यह क्षेत्र हरिद्वार-कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग से जुड़ा होने के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र, पर्यटन स्थलों तथा मालिन और रेतलाम नदियों के समीप भी पड़ता है। ऐसे में यहां कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित होने से पर्यावरण और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहेगी।
स्थानीय विरोध का हवाला
पूर्व मंत्री ने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की भावना के अनुरूप घनी आबादी वाले क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय नागरिक लंबे समय से प्रस्तावित स्थल का विरोध कर रहे हैं और कई बार धरना-प्रदर्शन तथा आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।
सीवर फार्म की भूमि को बताया विकल्प
सुरेंद्र सिंह नेगी ने समाधान के तौर पर अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय कोटद्वार के लिए आवंटित सीवर फार्म की भूमि को उत्तराखंड को उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह भूमि राज्य को मिल जाती है तो वहां एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और कूड़ा निस्तारण केंद्र विकसित कर शहर की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नगर निगम कोटद्वार की बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर वर्ष 2023 में शासन को भेजा जा चुका है।
मुख्यमंत्री से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की मांग
पत्र में नेगी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार से वार्ता कर पूर्व में कोटद्वार के लिए आवंटित भूमि को उत्तराखंड को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही वर्तमान में प्रस्तावित काशीरामपुर तल्ला क्षेत्र के कूड़ा निस्तारण केंद्र को जनहित में आवासीय क्षेत्र से दूर स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जाए।
राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दा
कूड़ा निस्तारण केंद्र का मुद्दा अब केवल नगर निगम की परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय राजनीति, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है, इस पर स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की नजरें टिकी रहेंगी।
(रिपोर्ट: कोटद्वार ब्यूरो)
