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आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर जनसंपर्क कार्यशाला हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एंड पीआर) में आयोजित की गई

PIB Delhi

भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने तेलंगाना सरकार के पंचायती राज विभाग के सहयोग से 2 मई, 2026 को हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एंड पीआर) में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर एक जनसंपर्क कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में तेलंगाना के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों में बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि शामिल थे। इनमें से 70 सरपंचों ने अपने-अपने ग्राम पंचायतों में स्वयं के स्रोत से राजस्व (ओएसआर) सृजन के मामले में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

मुख्य भाषण देते हुए, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने आत्मनिर्भर पंचायतों की परिकल्पना और आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत की दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जमीनी स्तर के शासन की परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि यह परिकल्पना आत्मनिर्भर और सशक्त पंचायतों के जरिए ही साकार हो सकती है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित कि पंचायतें राष्ट्रीय परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और नागरिकों को जागरूक करने तथा आत्मनिर्भर समुदायों के निर्माण की दिशा में समन्वित सामूहिक प्रयासों को गति देने में विशिष्ट रूप से सक्षम हैं।

उन्होंने पंचायत के नेताओं से अपने क्षेत्रों में सार्थक एवं स्थायी प्रभाव पैदा करने हेतु नवोन्मेषी सोच तथा निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि सच्चा नेतृत्व उस विरासत से परिभाषित होता है जो एक व्यक्ति अपने पीछे छोड़ता है। उन्होंने विकास और प्रगति के नए अवसरों को खोलने में परिप्रेक्ष्य के महत्व पर जोर दिया तथा प्रतिभागियों को वैसी सशक्त, लचीले एवं आत्मनिर्भर पंचायतों को आकार देने में परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में स्वयं को देखने के लिए प्रेरित किया, जो 2047 के भारत में योगदान देंगी।

तेलंगाना सरकार के पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव श्री एम. दाना किशोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा आर्थिक रूप से सशक्त ग्राम पंचायतों में निहित है। उन्होंने स्वयं के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने, अनुदानों पर निर्भरता कम करने और सरकारी निधियों का कुशल उपयोग करने पर बल दिया। तेलंगाना की प्रगति को रेखांकित करते हुए, उन्होंने नवाचार, रणनीतिक योजना और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों  को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सरपंचों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों से सीखने तथा सफल मॉडलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और इस बात पर बल दिया कि सुशासन की शुरुआत स्थानीय स्वामित्व, जवाबदेही और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी से होती है।

पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, तेलंगाना की आयुक्त (पीआर) श्रीमती डी. दिव्या और हैदराबाद स्थित हुडको लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रमुख श्री पी. सुभाष रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। तेलंगाना के उपायुक्त (पीआर) और आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के नोडल अधिकारी श्री पी. जे. वेस्ली ने ओएसआर को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रभावी स्थानीय शासन हेतु रचनात्मक एवं टिकाऊ दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक श्री गोवर्धन सिंह रावत ने इस बात की पुष्टि की कि विकसित भारत की परिकल्पना में ग्रामीण समुदायों को राष्ट्रीय विकास में अपरिहार्य भागीदार के रूप में मान्यता दी गई है और पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों के जरिए पंचायती राज मंत्रालय के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पंचायतों को आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता का सशक्त वाहक बनाने हेतु समन्वित संस्थागत प्रयासों का आह्वान किया।

पंचायती राज मंत्रालय की तकनीकी टीम ने आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का एक लाइव प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें एप्लिकेशन वर्कफ्लो तथा डैशबोर्ड का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत किया गया और प्रतिभागियों को प्रभावी डिजिटल कार्यान्वयन के संबंध में व्यावहारिक जानकारियां प्रदान की गई।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर आयोजित जनसंपर्क कार्यशाला में एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने तेलंगाना पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में प्रतिभागियों से बातचीत की। इस सत्र ने प्रश्नों के उत्तर देने, प्रस्तावों पर चर्चा करने और रचनात्मक संवाद एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का एक मंच प्रदान किया।

यह जनसंपर्क कार्यशाला देश भर में आत्मनिर्भर, जीवंत और आर्थिक रूप से सशक्त पंचायतों को साकार करने की दिशा में संवाद, ज्ञान-साझाकरण और क्षमता के विकास के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करती है।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पात्र ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और ऋण योग्य परियोजनाओं को विकसित व लागू करने में सहायता प्रदान करना है, जिससे उनके स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) मजबूत हों। एक पारदर्शी राष्ट्रीय चुनौती प्रक्रिया के जरिए, चयनित पंचायत प्रस्तावों को परियोजना विकास से लेकर वित्तीय समापन तक समर्पित तकनीकी सहायता प्राप्त होगी, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सीएसआर वित्तपोषण, बैंक वित्तपोषण और सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय शामिल है। ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति के जरिए सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, जिसमें विचार स्वयं पंचायतों से उत्पन्न होते हैं और तकनीकी सहायता विजेता प्रस्तावों को ऋण योग्य परियोजनाओं में परिवर्तित करती है। अपने चार वर्षीय कार्यान्वयन अवधि में, इस कार्यक्रम का लक्ष्य आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से आत्मविश्वासी पंचायतों की एक नई पीढ़ी का निर्माण करना है, जिनमें से प्रत्येक वित्तीय स्वतंत्रता और सुशासन के समन्वय का जीता-जागता उदाहरण हो।

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पीके/केसी/आर / डीए

(रिलीज़ आईडी: 2257585) आगंतुक पटल : 68

इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Telugu

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By udaen

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