हाशिए की आवाज़ को पहचान: सर्वप्रिया सांगवान को रामनाथ गोयनका पुरस्कार
बीबीसी की वरिष्ठ पत्रकार को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनके द्वारा तैयार की गई उनकी चर्चित श्रृंखला ‘द लास्ट मैन’ के लिए मिला है।

यह श्रृंखला भारतीय समाज के उन तबकों तक पहुंचती है जो विकास की मुख्यधारा से बाहर रह गए हैं—वो लोग जिनकी आवाज़ अक्सर नीतिगत विमर्श और मीडिया कवरेज दोनों में दब जाती है। ‘द लास्ट मैन’ ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए उन समुदायों की कहानियों को सामने लाने का काम किया जो राज्य की योजनाओं के अंतिम छोर पर खड़े हैं।

यह पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया जाता है, और भारतीय पत्रकारिता में निष्पक्षता, साहस और जनसरोकार की उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है।

सर्वप्रिया सांगवान के लिए यह उपलब्धि विशेष इसलिए भी है क्योंकि उन्हें यह सम्मान दूसरी बार मिला है—जो उनकी निरंतर खोजी पत्रकारिता और हाशिए के मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मान?
- हाशिए की आवाज़ को मुख्यधारा में लाना: ‘द लास्ट मैन’ जैसी रिपोर्टिंग नीति-निर्माताओं को जमीनी सच्चाई से जोड़ती है।
- जनपक्षीय पत्रकारिता की पुष्टि: यह पुरस्कार बताता है कि संवेदनशील और तथ्याधारित रिपोर्टिंग आज भी प्रासंगिक और प्रभावी है।
- लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूती: जब मीडिया समाज के सबसे कमजोर वर्गों की बात करता है, तभी लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ साकार होता है

यह सम्मान सिर्फ एक पत्रकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता की जीत है जो सत्ता के बजाय समाज के अंतिम व्यक्ति को केंद्र में रखती है।

