– रिपोर्ट: Udaen News Network | 23 अक्टूबर 2025
नई दिल्ली।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और जल संकट से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली सरकार और IIT कानपुर की संयुक्त टीम ने बुराड़ी क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) का सफल परीक्षण किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगर आगामी दिनों में मौसम अनुकूल रहा तो 29 अक्टूबर को राजधानी में कृत्रिम वर्षा कराई जाएगी।
🌧️ क्या है क्लाउड सीडिंग?
क्लाउड सीडिंग एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके जरिए कृत्रिम रूप से वर्षा कराई जाती है। इसमें विमानों या ड्रोन के माध्यम से सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड और ड्राई आइस जैसे रासायनिक तत्वों को बादलों में छोड़ा जाता है।
ये कण बादलों में संघनन केंद्र (Condensation Nuclei) के रूप में काम करते हैं, जिससे जलवाष्प बूंदों में बदलकर वर्षा का रूप ले लेती है।
⚙️ कैसे किया गया बुराड़ी में परीक्षण
परीक्षण के दौरान दो विशेष विमानों को तैयार किया गया जिनमें क्लाउड सीडिंग के उपकरण लगाए गए थे।
IIT कानपुर की वैज्ञानिक टीम ने मौसम की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद विमानों को बुराड़ी क्षेत्र के ऊपर उड़ाया।
बादलों में नमी की सक्रियता दर्ज की गई और सीडिंग एजेंट छोड़ने के बाद संघनन की स्पष्ट प्रक्रिया देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण “सफल और नियंत्रित” रहा है, और यह दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने में एक नया विकल्प साबित हो सकता है।
🌍 क्यों ज़रूरी है कृत्रिम वर्षा दिल्ली के लिए
दिल्ली हर साल सर्दियों की शुरुआत में प्रदूषण के गंभीर स्तर से गुजरती है।
कृत्रिम वर्षा के माध्यम से हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 जैसे प्रदूषक तत्वों को नीचे बैठाया जा सकता है, जिससे वायु गुणवत्ता में तात्कालिक सुधार होता है।
साथ ही, सूखे और जल संकट वाले क्षेत्रों में भी यह तकनीक उपयोगी मानी जाती है।
⚠️ कितनी सुरक्षित है यह प्रक्रिया?
विशेषज्ञों का कहना है कि सिल्वर आयोडाइड की मात्रा नियंत्रित होने पर यह प्रक्रिया पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
हालांकि, लगातार प्रयोग या अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और जल में रासायनिक अवशेषों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
इसी कारण हर बार प्रयोग से पहले विस्तृत मौसम और पर्यावरणीय समीक्षा अनिवार्य मानी जाती है।
🧭 भारत में अब तक कहाँ-कहाँ हुआ प्रयोग
महाराष्ट्र (2018) – मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखा राहत के लिए।
कर्नाटक (2019) – सूखा प्रभावित बेल्लारी और चित्रदुर्ग क्षेत्रों में।
तेलंगाना (2022) – प्रदूषण नियंत्रण हेतु हैदराबाद में।
और अब दिल्ली (2025) – वायु प्रदूषण और जल संकट दोनों से निपटने के लिए।
🗣️ विशेषज्ञों की राय
IIT कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार –
“अगर मौसम में पर्याप्त नमी रही तो 29 अक्टूबर को की जाने वाली कृत्रिम वर्षा न केवल दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाएगी, बल्कि इसका प्रयोग भविष्य में अन्य महानगरों में भी किया जा सकेगा।”
✍️ निष्कर्ष
दिल्ली के लिए यह प्रयोग एक उम्मीद की तरह है —
जहाँ सरकार, विज्ञान और पर्यावरण तीनों एकजुट होकर प्रदूषण के संकट से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अगर 29 अक्टूबर को कृत्रिम वर्षा सफल रही, तो यह देश की राजधानी के लिए प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक ऐतिहासिक दिन साबित हो सकता है।
📰 रिपोर्ट: Udaen News Network (दिल्ली ब्यूरो)
📅 तारीख: 23 अक्टूबर 2025
📸 फ़ोटो स्रोत: IIT Kanpur & Delhi Govt. Media Cell
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