बैठक में वाम पार्टियों ने 9 जुलाई को देश के सभी प्रमुख मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत आम हड़ताल के समर्थन का ऐलान किया. वाम नेताओं ने कहा कि मजदूरों के दशकों के संघर्षो से हासिल श्रम कानूनों को रद्द करके नरेंद्र मोदी की सरकार चार लेबर कोड (श्रम संहिताएं) मजदूरों पर थोपना चाहती है. ये लेबर कोड मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का कानूनी रास्ता खोलते हैं. देश का मजदूर वर्ग, ना तो गुलामी के लेबर कोड्स को स्वीकार करेगा और ना ही संविधान व लोकतंत्र पर हमला बोलने वाली सांप्रदायिक, फासिस्ट सत्ता को ही बर्दाश्त करेगा. वामपंथी पार्टियां पूरी ताकत के साथ इस अभियान में मजदूर संगठनों के साथ 9 जुलाई को सड़कों पर उतरेंगी.
वामपंथी नेताओं ने कहा कि कांवड़ यात्रा के शुरू होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्री सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर उतर आए हैं. कांवड़ यात्रा के रास्ते के दुकानदारों को जबरन अपना नाम लिखने को कहना, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को ही तेज करने की कोशिश है. बीते वर्ष ही उच्चतम न्यायालय नाम लिखने के लिए बाध्य किये जाने को गैरकानूनी घोषित करते हुए, इस पर रोक लगा चुका है. पुनः इस बार लोगों को नाम लिखने के लिए विवश किया जाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन है. यह विडंबना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पूरी भाजपा और उनके द्वारा पोषित समूहों ने हर त्योहार को अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा के प्रसार के अभियान में तब्दील कर दिया है. धर्म के आधार पर नागरिकों को विभेद करने की इस असंवैधानिक प्रवृत्ति पर अविलंब रोक लगनी चाहिए.
बैठक में भाकपा के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य कॉमरेड समर भंडारी, राज्य परिषद सदस्य कॉमरेड अशोक शर्मा, माकपा के राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र पुरोहित, माकपा के केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड राजेंद्र सिंह नेगी, भाकपा(माले) के राज्य सचिव कॉमरेड इन्द्रेश मैखुरी, राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड के के बोरा आदि शामिल थे.
