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कृषि उद्योग समागम 2025, नरसिंहपुर (म.प्र.) में उपराष्ट्रपति के संबोधन का पाठ (अंश)

भारत माता की जय, नरसिंह जी महाराज की जय !

आज का कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है और मैं अभिभूत हूँ मेरे सामने भाइयों, बहनों माताओं युवा शक्ति सब अन्नदाता के प्रतीक हैं, देश के भाग्य विधाता हैं। किसान की जितनी पूजा की जाए वह कम है। किसान भारतकी रीढ़ की हड्डी है-सामाजिक हो आर्थिक हो और समरसता का प्रतीक है।

मंच पर श्री मंगुभाई पटेल, राज्यपाल मध्यप्रदेश, उन्होंने राजनीतिक यात्रा शुरू की 1990 में जब मैं केंद्र में मंत्री था और 2017 तक लगातार विधायक रहे और जनजाति के राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़े नेता हैं। आपके ओजस्वी मुख्यमंत्री, श्री मोहन यादव मनमोहक हैं, कार्यशील हैं और एक दिन में कोई ऐसा पल नहीं जाने देते जब गाँव और किसान की चिंता न करते हों। इनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश सबसे लंबी छलांग लगाएगा। यह मैं मेरे सामने देख रहा हूँ क्योंकि आज का जो पहल है कृषि को उद्योग से जोड़ने का, दोनों का मिलन कराने की यह बहुत बड़ी सोच है। इसकी पहल आपने करी है, आप साधुवाद के पात्र हैं।

मेरा इस क्षेत्र से लगाव माननीय मुख्यमंत्री जी उदय प्रताप सिंह जी की वजह से बहुत ज़्यादा है। इसकी शुरुआत 2004 के आसपास हुई, मेरे मामा की पोती जिसका नाम सोनाली है और जब ससुराल देखते हैं लड़की के लिए तो ठोक-बजा कर देखते हैं और हमने ठोक-बजाकर देखा तो यह इलाका पसंद आ गया और उनकी शादी प्रसून डोरेलिया से कराई, उनके पिताजी स्वर्गीय के के डोरेलिया जी से मुलाकात हुई तो आदमी सबसे पहले ध्यान देता है कि बेटी कहाँ जा रही है, नरसिंहपुर को देखो। उसके बाद 2009 में उदय प्रताप जी सांसद बने और मुझे पृष्ठभूमि बताई और मैं अभिभूत हो गया कि इसका लगाव राजस्थान से भी है, हमारे दिल और दिमाग से भी है और 3 दशक पहले का है तब मन में एक लालसा हुई कि यहाँ किसानों के साथ साक्षात्कार किया जाए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी साधुवाद के पात्र हैं — दो वजहों से खासतौर पर आज के लिए। मेरे जीवन में यह पल देखने को मिले हैं आपके सौजन्य से और वह भी कार्यक्रम कैसा — कृषि उद्योग समागम 2025। मैं मानकर चलता हूँ देश का हर प्रांत इसका अनुकरण करेगा। किसान से कृषि का लगाव बहुत होना चाहिए। मुख्यमंत्री जी सांस्कृतिक रूपसे भी कृषि से जुड़ाव रखते हैं। अब माखनचोर बनने की तो अवश्यकता नहीं है क्योंकि आपने तो डेरी उद्योग को बहुत बढ़ावा दे दिया है। 29 मई से 12 जून तक भारत सरकार का कृषि मंत्रालय भी एक आयोजन कर रहा है — ‘कृषि वैज्ञानिक आपके गाँव’ अभियान, क्योंकि किसान अन्नदाता है, हमारा भाग्य विधाता है पर एक तरीके से मुख्यमंत्री जी आपने एक नई पहल की है। मैं मानकर चलता हूँ कि राष्ट्रीय स्तर पर इसको माना जाएगा।

आज पूरा देश राष्ट्र भावना से ओतप्रोत है, राष्ट्र को समर्पित है, आतंकवाद के खिलाफ़ एकजुट है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पहलगाम का जवाब ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से लिया, उसका लोहा दुनिया ने माना है। विश्व के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि देश का प्रधानमंत्री बिहार से विश्व को एक संदेश देता है “जिन्होंने सिंदूर मिटाया है उन्हे धरती पर रहने का अधिकार नहीं है।” अंतर्राष्ट्रीय सीमा के अंदर घुसकर बहावलपुर, मुरीदके जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर क्या सटीक बमबारी हुई, नष्ट कर दिया। कोई प्रमाण नहीं मांग रहा है, कारण जब coffin ले जाए जा रहे थे, उनकी फौज खड़ी थी, उनके नेता खड़े थे, आतंकवादी खड़े थे। भारत को प्रमाण की आवश्यकता नहीं, जिनको चोट लगी है, उन्होंने यह प्रमाण विश्व के सामने दे दिया।

भारत के प्रधानमंत्री का संकल्प एक लौह पुरुष की तरह है, अब हर व्यक्ति राष्ट्र भावना से, राष्ट्रहित से ओत-प्रोत है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि आज का भारत यह मानता है कि इस पराक्रम ने, हमारी सेनाओं के पराक्रम ने हर भारतीय का सर ऊंचा कर दिया है। हम शान से कहते हैं, हम भारतीय हैं, भारत बदल चुका है। भारत आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा, जो 70 साल में नहीं हुआ वह कठोर निर्णयभारत के प्रधानमंत्री ने लिया और पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया और कहा, “खून और अपनी एक साथ नहीं बहेगा” — यह बहुत बड़ा संदेश दिया है।

जिनका सिंदूर उजड़ा, उनकी लाज रखी है। आज का भारत साहसी है, आत्मविश्वासी है और दुनिया को समझ में आ गया है, आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि जो प्रधानमंत्री का आह्वान है — हम भारतीय हैं, भारतीयता सर्वोपरि है,  राष्ट्रहित से ऊपर कोई हित नहीं हो सकता और आज पूरा देश इससे ओत-प्रोत है। पिछले दशक में भारत ने बड़ी आर्थिक उछाल लगाई, बड़ी जबरदस्त लगाई। हम बड़ी कमजोर स्थिति में थे दुनिया में, पर एक बड़ी खुश खबरी है। आज भारत दुनिया की चौथी महाशक्ति अर्थव्यवस्था में बना है। हमने किनको पीछे छोड़ा? हमने फ्रांस को छोड़ दिया, इंग्लैंड को छोड़ दिया, जापान को छोड़ दिया अब किसकी बारी है? जर्मनी की।  और बहुत ही जल्द भारत दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनने वाला है।

आप पूरे देश में देख रहे हो कि ढाँचा किस तरीके से बढ़ रहा है, आप के मुख्यमंत्री ने कहा पीड़ित को राहत देना फिर यह नहीं देखना कि helicopter काम मे आएगी कि हवाई जहाज काम में आएगी। सड़कों का जाल यह पूरे देश में फैला हुआ है। पर मेरा यह कहना है और यह सही निर्णय है। माननीय मुख्यमंत्री जी आपका — विकसित भारत का रास्ता, किसान के खेत से जाता है। विकसित भारत का रास्ता गाँव से निकलता है। विकसित भारत की कुंजी किसान के पास है और उस किसान को आप सृजन कर रहे हैं। वह संकल्पित हो रहा है और अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा उछाल आएगा। पूरे देश में विकसित भारत के लिए एक महायज्ञ चल रहा है जो हर किसी की आहुति माँगता है पर सबसे निर्णायक आहुति किसान की है और मैं मान कर चलता हूँ कि मेरे किसान भाई पूरी तरह सजग हैं। यह लक्ष्य हम प्राप्त कर के रहेंगे पर मैं आग्रह करूंगा किसान भाइयों से, आप अपने को उत्पाद तक सीमित मत रखो। आपको इसकी मार्केटिंग में भी पड़ना चाहिए, आपको इससे जुड़े कृषि उद्योगों से भी आगे बढ़ना चाहिए। आपको इसकी मार्केटिंग में भी पड़ना चाहिए तभी तो किसान की उन्नति होगी। किसान को व्यापार में आना चाहिए, उद्योग में आना चाहिए और इसीलिए माननीय मुख्यमंत्री का यह निर्णय बहुत आवश्यक है, मैं मानकर चलता हूँ कि मध्य प्रदेश वो प्रांत होगा जहाँ किसान उद्यमी ज्यादा से ज्यादा होंगे।

I have said on several occasions, Farmers must emerge as entrepreneurs in Agro sector. Our farmers must define entrepreneurship, I call them Agripreneurs, We must have Agripreneurs in millions who will engage with Agro-produce marketing, Agro-produce value addition who will lead in dairying in vegetable and fruits.

और यह खुशी की बात है कि आज के दिन किसान के साथ संवाद हो रहा है। देश में 730 कृषि विज्ञान केंद्र हैं और Indian Council for Agricultural Research भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनेक संस्थाएं हैं वह सब अब सजग हो गई हैं, जागृत हो गई हैं और मुझे प्रसन्नता का विषय है कि जिस ओर मैंने ध्यान आकर्षित मुंबई में करवाया था वह आज के दिन जमीनी हक़ीक़त है। किसानों का, सरकार का, समर्थन बहुत ज़्यादा है। किसान को हर तरीके से सरकार मदद कर रही है — पीएम किसान निधि सम्मान सीधा किसान के खाते में जाता है, पर अब आवश्यकता है कि बाकी सहायता जो किसान को मिल रही है वह सीधी किसान के खाते में जाए क्योंकि इससे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। आज मैं मन से ऐलान करना चाहता हूँ कि कृषि सिर्फ आर्थिक क्षेत्र नहीं है कृषि का उद्योग से भारी लगाव है और माननीय मुख्यमंत्री ने यह पहल की है। हमारी आधी आबादी कृषि पर आधारित है, इसको देखकर मुझे बड़ा अच्छा लगा कि मैंने आज कृषि उद्योग समागम का उद्घाटन किया। मैं किसान भाइयों को सलाम करूंगा, आप अनाज ही नहीं उठाते आप राष्ट्र की भूख मिटाते हैं। आप राष्ट्र को आत्मनिर्भर करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। अब देखिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पहल की PM किसान निधि अब तक 3 लाख 46 करोड़ रुपए 10 करोड़ किसानों के खाते में आ गए हैं।

हर साल तीन बार ये रकम आती है पर मुझे यह कहना है किसान की आमदनी में उत्थान आएगा जब हर सहायता किसान को सीधी मिलेगी। अमेरिका वो देश है जहां किसान परिवार की आय सामान्य परिवार की आय से ज़्यादा है, इसका एक आधार है कि किसान को सीधी सरकारी सहायता मिलती है। हमारे यहां खाद को लेकर बहुत बड़ी सब्सिडी है, अन्य भी बहुत बड़ी सब्सिडी हैं पर वो indirect है। यदि वो सब सीधी किसान को दी जाए तो मेरा आंकलन है एक आधार पर कि हर किसान को हर साल कम से कम 35,000 रुपए मिलेंगे। मैं मानकर चलता हूँ कि इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च इस पर ध्यान देगी, इस पर पूरी तरह से एक टिप्पणी का कागज निकालेगी ताकि किसान को ज़्यादा से ज़्यादा फायदा हो पाए।

जब खेत मुसकुराता है, भारत आगे बढ़ता है। यह समागम है, यह एक शुरुआत है पर मुझे बहुत अच्छा लगा कि जो कदम मुख्यमंत्री ने उठाए हैं खासतौर से डेयरी के मामले में, पशुधन के मामले में, सब्जी के मामले में, फलों के मामले में। हमें तो विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। वह दिन दूर नहीं है कि किसान के यहाँ सिर्फ दूध तक मामला सीमित नहीं रहेगा, दही तक नहीं रहेगा छाछ तक नहीं रहेगा, आइस-क्रीम तक नहीं रहेगा, रसगुल्ले तक नहीं रहेगा। यहाँ Cheese बनेंगे, नई तकनीकें आएंगी और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भारत का किसान राष्ट्रभक्ति में कभी कमी नहीं करता। भारत का किसान सब कष्ट सहन करके, विपरीत परिस्थितियों में — कई बार वो इंद्रदेवता की देरी से भी हो जाती है — किसान हिम्मत नहीं हारता। किसान को यदि अगर प्रेरित किया जाएगा कि किसान उद्योग में पड़े, किसान व्यापार में आए, तो देश की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का जो लक्ष्य है, वो 2047 से पहले हासिल हो पाएगा।

अंत में भाइयों और बहनों आप मेरे प्रेरणा के स्रोत हैं, जिस इलाके से यह बात कह रहा हूँ वह कृषि की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, यहाँ पर तकनीकी का विकास बहुत हो सकता है और हो भी रहा है यहाँ के लोगों ने, उद्यमों ने काफी विकास किया है। पर मैं यह कहूंगा कि कृषि और उद्योग का पूरा का पूरा फायदा उठाइए और यह तभी संभव है जब माननीय मुख्यमंत्री जी उद्योगों को भी कहिए, वे कृषि उत्पाद से काम करते हैं, फैक्ट्रियां चलाते हैं। यह बहुत अच्छा रहेगा कि कृषि आधारित उद्योग, सांसद, विधायक और प्रमुख NGOs किसान गाँव को गोद लें, उस गाँव की काया पलट का संकल्प लें। उसमें Agri-entrepreneurs, Agripreneurs, किसान उद्यमी का बढ़ावा दें। यह उनके लिए भी ठीक रहेगा, क्योंकि उनकी आर्थिक संपन्नता का आधार किसान है, तो किसान की उसमे भागीदारी स्वाभाविक है।

अंत में, मैं एक बार फिर कृषि उद्योग समागम 2025 के सभी आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने यह विचार जमीनी हकीकत बनाया है, राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में इसका बहुत असर होगा। चलिए सब मिलकर एक नया भारत बनाएँ जहाँ खेती में तकनीक हो, गाँव में समृद्धि हो और किसान के चेहरे पर मुस्कान हो क्योंकि भारत का भविष्य खेतों में लिखा जाएगा, और लिखा जा रहा है।

जय किसान !

धन्यवाद।


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By udaen

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