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प्रकृति के अनुकूल चलने की आवश्यकता
लम्बे अरसे से देख रहा हूं जल जंगल जमीन को बचाने की बातें सब लोग करते हैं ,पर हकीकत यह है कि पीने योग्य जल खत्म होने की कगार पर है , जंगल काट दिए गए हैं जमीनें खेती अन्न उगाने की जगह कंक्रीट की हो गई है बेच दी गई है , अर्थात मुफ्त में प्रकृति से मिले जल को हमने व्यापार बना दिया ,मुफ्त में मिले जंगलों को काटकर रोजगार बना दिया , जमीनें खेती के बजाय कंक्रीट के जंगल में तब्दील कर दिया , आखिर क्यों होगी चिन्ता हमें हम भौतिक जगत में खुद को ही भूल गए हैं खुली आंखों पर पट्टी बंधी हुई है कहते हैं जीवन जीने के लिए पैसा चाहिए मैं कहता हूं जीवन जीने के लिए मिट्टी में अन्न उगाना जरुरी है , पीने योग्य पानी चाहिए और शुद्ध हवा के लिए जंगल चाहिए ,भोजन ,पानी , जंगल जो अमूल्य होकर भी हम इनकी महत्वता को नहीं समझ पा रहे ,,, जिस दिन धरती छोड़ देगी अन्न उगाना , जिस दिन नदियां ,धारे बहना बंद कर देंगे और जिस दिन जंगल खत्म हो जायेंगे सायद उस दिन जरूर समझ आ जाएगा , जिस तेजी से हम अपने खुली आंखों से विकास को देख रहे हैं उससे भी तेज गति से प्रकृति से मिलने वाला भोजन पानी हवा भी खत्म हो रही है आज से 30 वर्ष पूर्व तक मानव की उम्र 100 साल होती थी आज 60-80 तक में सिमट गया है और आने वाले 30 साल बाद 50-60 तक की उम्र होगी , और हम अपने आने वाली पीढ़ी के लिए और भी कम उम्र छोड़ जायेंगे ,मेरा खुद का अनुभव है और आप सबने भी देखा होगा किसान कभी भी भूखा नहीं रह सकता ,कोरोना काल में भी सिर्फ किसान की मेहनत ने ही लोगों का पेट पाला ,आज हम अपने अपने व्यापार में जमे हैं बहुत अच्छी बात है परन्तु छडिक समय क्या हम पर्यावरण , प्रकृति को दे रहे हैं , हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ चलकर समय व्यतीत किया जबकि हम लोगों के प्रकृति के प्रतिकूल चलना प्रारंभ कर दिया है ,जिसका सीधा असर हमें खुली आंखों से नहीं दिख पा रहा है ,,, हमारी उस बंदर की तरह स्थिति होने वाली है एक बार एक वैज्ञानिक ने प्रयोग किया एक बड़े बॉक्स में एक बंदर को डाल दिया और उसमें बहुत सारा भोजन डाल दिया और साथ ही उस बॉक्स में ऊपर चढ़ने के लिए सीडी लगा दी फिर उसने उस बॉक्स के नीचे हल्की हल्की आंच में आग लगा दी हल्की गर्मी का एहसास करने के बाद बंदर शीडी से ऊपर नहीं आया क्योंकि उसे वहां पर्याप्त भोजन मिल रहा था फिर धीरे-धीरे वैज्ञानिक ने आज बढ़ाई बंदर को तो भोजन मिल रहा था वह शिडी से ऊपर क्यों चढ़ता एक स्थिति ऐसी आई जब बंदर उस गर्मी की वजह से कमजोर होने लगा और सीडी से ऊपर चड नहीं पा रहा था भोजन के चक्कर में बंदर ने अपना जीवन समाप्त कर दिया यही स्थिति हम लोगों के साथ भी हो रही है आज इस भौतिक जगत की चकाचौंध में हम अपने जीवन की मूलभूत चीजों को भूल रहे हैं जिस जल जंगल जमीन की लड़ाई हमारे लोग लड़ते आ रहे हैं आज उस जल जंगल जमीन को बचाने के बजाय बेचने की कवायद में हम लोग लगे हुए हैं ,
पर्यावरण प्रेमी
चन्दन सिंह नयाल


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By udaen

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