बीरोंखाल ब्लाक के देवकुंडई गांव में दो गुलदार पकड़े जाने और एक गुलदार के मारे जाने के बाद एक बार फिर से दो गुलदार दिखाई देने से ग्रामीणों में फिर दहशत छा गई है। लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
देवकुंडई गांव में पिछले वर्ष चार अक्तूबर को खेत से अपने घर लौट रही 11 वर्षीय राखी रावत और उसके मासूम भाई चार वर्षीय राघव पर गुलदार ने हमला कर दिया था। राखी ने बहादुरी का परिचय देते हुए अपने भाई की जान बचाई थी, जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गई। तब वन विभाग ने गांव में पिंजरा लगाकर दो गुलदार पकड़े थे। इसके बाद आठ दिसंबर को अपनी मां के साथ गोशाला में गए नौ साल के मासूम अनिकेत को गुलदार ने मार डाला था। बच्चे की मौत के बाद वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे मारने के लिए दो शिकारी गांव में तैनात किए थे। शिकारियों ने 26 दिसंबर को गुलदार को मार डाला था। गुलदार के मारे जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन 11 दिन बाद गांव में फिर दो अन्य गुलदार सक्रिय होने से ग्रामीणों में फिर दहशत छा गई है।
ग्राम प्रधान यशपाल सिंह रावत, बहादुर बच्ची राखी की दादी बिमला देवी ने बताया कि आदमखोर गुलदार के मारे जाने के एक हफ्ते बाद से गांव के पास दो गुलदार देखे जा रहे हैं, जिसके कारण ग्रामीणों में गुलदार का खौफ बना हुआ है, लोग शाम ढलते ही घरों में कैद हो जा रहे हैं। गांव में गुलदार देखे जाने की जानकारी वन विभाग को दे दी गई है। उन्होंने वन विभाग से गुलदारों को गांव से खदेड़ने की मांग की है। उधर, पोखड़ा रेंज अधिकारी राखी जुयाल ने बताया कि उन्हें अभी देवकुंडई गांव में गुलदार दिखाई देने की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। वन कर्मियों को भेजकर गांव में गश्त बढ़ाई जाएगी और पिंजरा लगा दिया जाएगा।
