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जीएसटी का लक्ष्य था 13.71 लाख करोड़, दिसंबर तक 1.18 लाख करोड़ कम मिले

  • 6 महीनों में केंद्र ने राज्यों को चुकाया 81 हजार करोड़ मुआवजा
  • लगातार दूसरे माह जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रु. पार, फिर भी यह लक्ष्य से कम इसलिए केंद्र को देना पड़ रहा दोगुना मुआवजा

नई दिल्ली लगातार दूसरे माह जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है। हालांकि, इसके बावजूद जीएसटी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। केंद्र सरकार को लक्ष्य के मुताबिक कलेक्शन नहीं मिल पा रहा है। राज्य भी 14 फीसदी प्रतिवर्ष जीएसटी कलेक्शन की ग्रोथ हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने राज्यों को जितना मुआवजा पिछले वर्ष दिया, उतना सिर्फ इस वित्तीय वर्ष के छह माह में ही दे दिया। झगड़ा तय समय पर मुआवजा देने को लेकर भी है। केंद्र ने हाल ही में अगस्त-सितंबर के बकाया 35 हजार करोड़ रुपए राज्यों को दिए हैं।

पिछले साल केंद्र ने राज्यों को 81 हजार 177 करोड़ रुपए की राशि बतौर मुआवजा दी थी। टैक्स रेट घटने सहित अलग-अलग कारणों के चलते इस साल अप्रैल से सितंबर तक ही सरकार 81 हजार 42 करोड़ दे चुकी है।

11 सवाल-जवाब में जीएसटी की स्थिति

सवाल- केंद्र-राज्यों में क्या विवाद है?

जवाब- 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ। जीएसटी (कंपनसेशन-टू स्टेट्स) एक्ट- 2017 के मुताबिक अगर राज्यों के जीएसटी कलेक्शन की दर में तय वृद्धि (14% सालाना) नहीं होती है तो बाकी रकम की भरपाई केंद्र को करनी है। प्रावधान 5 वर्षों के लिए है। इसके लिए वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष माना गया है। केंद्र हर दो महीने बाद राज्यों के कलेक्शन को देखकर यह राशि दे रही है। भुगतान में देरी ही विवाद की वजह है।

सवाल- जीएसटी कलेक्शन क्यों गिर रहा है?

जवाब

  • जीएसटी लागू होते समय औसत कर की दर 15.3 प्रस्तावित थी। दर घटाने से यह 11.6 फीसदी रह गई।
  • पहले 20 लाख रुपए तक गुड्स कारोबार करने वालों को जीएसटी नंबर लेने से छूट थी। फिर इस सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दिया गया।
  • कंपोजीशन की सीमा 75 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए कर दी गई।
  • जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.5 फीसदी रहने, महंगाई दर कम रहने और उपभोक्ता खर्च घटने से भी कलेक्शन कम हो रहा है।
  • कम रिटर्न फाइलिंग के कारण भी टैक्स घट रहा है। सरकारों ने भी इस ओर ध्यान दिया है, नवंबर में 77.8 लाख रिटर्न दाखिल हुए थे जबकि दिसंबर में 81.2 लाख रिटर्न फाइल हुए।

सवाल- कलेक्शन लक्ष्य से कितना पीछे है?
जवाब- चालू वित्त वर्ष के लिए कलेक्शन का लक्ष्य 13.71 लाख करोड़ रुपए था। यानी प्रति माह करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए। 9 माह में जीएसटी कलेक्शन 9.08 लाख करोड़ रहा। हर माह औसतन 1 लाख 927 करोड़। दिसंबर तक का कलेक्शन लक्ष्य से 1.18 लाख करोड़ रुपए कम हैं।

सवाल- इस साल कितना मुआवजा देना होगा?
जवाब- जीएसटी काउंसिल के अनुमान के अनुसार कलेक्शन में 5% भी वृद्धि होती है तो उसे कंपनसेशन खर्च करीब 1.6 लाख करोड़ रु पड़ेगा। कंपनसेशन सेस का कलेक्शन चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब 96.8 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है। ऐसे में केंद्र पर अतिरिक्त 63 हजार करोड़ रुपए का भार आने का अनुमान है।

सवाल- देश में जीएसटी लागू होने के बाद हर महीने कलेक्शन की स्थिति क्या रही?

जवाब-

सवाल- क्या सरकार ने अपने लक्ष्य को बदला है?
जवाब-
 दिसंबर से मार्च 2020 तक के लिए 1.1 लाख करोड़ प्रति माह जीएसटी कलेक्शन का लक्ष्य तय किया गया। इन चार महीनों के दौरान ही किसी एक माह में 1.25 लाख करोड़ रुपए कर संग्रह करना होगा।  हालांकि दिसंबर में 1.03 लाख करोड़ रुपए ही जीएसटी कलेक्शन हुआ है।

सवाल- केंद्र मुआवजे की राशि कहां से जुटाता है?
जवाब- केंद्र सरकार विभिन्न वस्तुओं पर सेस वसूली से राज्यों को कंपनसेशन देती है। पान मसाला, सॉफ्ट ड्रिंक्स और बड़ी कारों पर केंद्र सेस वसूलता है। लेकिन वर्तमान में सरकार को इस मद से इतना पैसा नहीं मिल रहा है कि वो राज्यांे को पूरा पैसा दे सके। वर्तमान में केंद्र सरकार को सेस से करीब आठ हजार करोड़ रुपए प्रति माह ही मिल रहे हैं। जबकि प्रति माह उसे करीब 13 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान करना है।

सवाल- केंद्र राज्यों को कितना पैसा दे चुका है?
जवाब- जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई से मार्च 2018 के दौरान 48 हजार 178 करोड़ रुपए दिए थे। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में कुल 81 हजार 177 करोड़ रुपए दिए थे। जबकि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर तक केंद्र सरकार के द्वारा राज्यों को 81 हजार 42 करोड़ रुपए दिए गए। इस तरह जीएसटी लागू होने के बाद से केंद्र सरकार ने राज्यों को दो लाख 10 हजार 397 करोड़ रुपए दे चुकी है।

सवाल- सरकार जीएसटी लक्ष्य पाने के लिए भविष्य में क्या कदम उठाएगी?

जवाब-

  • सूत्रों के मुताबिक अगर जीएसटी रिटर्न जमा नहीं किया गया तो ई-वे बिल ब्लॉक करने और पंजीकरण रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
  • उद्योग और करोबारियों को सलाह दी गई है कि वे अपने आपूर्तिकर्ताओं से जीएसटी रिटर्न समय से दाखिल करने को कहें। असफल रहने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल सकेगा।
  • पुराने बकायों की वसूली के लिए भी अगले तीन महीनों के दौरान राज्यों में अभियान चलाया जाएगा।
  • एडिशनल इनपुट क्रेडिट क्लेम जीएसटी काउंसिल ने 20% से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। इस कारण से खरीददार को शुरुआत में अधिक टैक्स जमा करना पड़ेगा।
  • सरकार जीएसटी रिटर्न नहीं भर रहे व्यापारी के जीएसटी नंबर रद्द करने और कुर्की जैसी कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रही है।
  • एक जनवरी 2020 से लॉटरी पर 28 फीसदी कर वसूला जाएगा। अभी राज्य संचालित लॉटरियों पर 12 फीसदी और राज्य से अनुमति प्राप्त लाटरियों पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। केंद्र सरकार कुछ और वस्तुओं पर सेस लगा सकती है या मौजूदा सेस को बढ़ा भी सकती है।

सवाल- अभी तक देश में जीएसटी कर चोरी के कितने मामले पकड़े गए?

जवाब-

  • उत्तर प्रदेश को वर्ष 2019-20 में 4089 करोड़ रुपए केंद्र से मिले हैं। वर्ष 2018-19 में जीएसटी बढ़ोतरी दर बीते वर्ष के मुकाबले 19.3 प्रतिशत था। इसलिए इस वर्ष कोई भी मुआवजा नहीं लिया है।

(सोर्स: जीएसटी काउंसिल, बजट डाक्यूमेंट, केंद्रीय वित्त मंत्रालय, संसद के प्रश्नों के उत्तर, विभिन्न राज्य सरकारों के वाणिज्यकर अधिकारी, मीडिया रिपोर्ट्स आदि के अनुसार।)

आभार : धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया


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By udaen

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