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पकौड़े बेचकर बिजनेस की दुनिया में उतरे थे धीरूभाई अंबानी, शेख को बेच डाली थी मिट्टी

शुरूआत में धीरूभाई ने अपने घर के पास एक धार्मिक स्थल के नजदीक पकौड़े बेचने का व्यापार शुरू किया। हालांकि उनका यह व्यापार पूरी तरह से पर्यटकों पर निर्भर था, इसलिए ज्यादा मुनाफा ना होते देख उन्होंने इस काम को बंद कर दिया।

Author मुंबई | Updated: December 28, 2019 2:52 PM

धीरूभाई अंबानी ने पकौड़े बेचने के व्यापार से अपने बिजनेस की शुरूआत की थी। (एक्सप्रेस/ फाइल)

हमारे देश में अपने दम पर मुकाम बनाने वाले लोगों का जब भी जिक्र होगा, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक रहे धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) का नाम जरूर शामिल होगा। आज धीरूभाई अंबानी की 87वां जयंती है। धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर, 1932 को गुजरात के सिलवासा में हुआ था और उन्हीं ने देश की प्रतिष्ठित कंपनी रिलायंस ग्रुप की नींव रखी थी।

धीरूभाई अंबानी की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 300 रुपए महीने की सैलरी से अपने करियर की शुरूआत की थी, लेकिन अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर वह कुछ ही सालों में करोड़ों की कंपनी के मालिक बन गए। आज उनके द्वारा खड़ी की गई रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी कंपनी है और कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 9 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है।

ऐसे हुई धीरूभाई अंबानी के करियर की शुरूआतःधीरूभाई अंबानी ने सिर्फ हाईस्कूल तक ही पढ़ाई की थी और कम उम्र से ही वह व्यापार के क्षेत्र में आ गए थे। शुरूआत में धीरूभाई ने धीरूभाई ने फल और नाश्ता बेचने का काम किया। जिसमें उन्हें खास सफलता नहीं मिली। इसके कुछ समय बाद उन्होंने घर के पास एक धार्मिक स्थल के नजदीक पकौड़े बेचने का व्यापार शुरू किया। हालांकि उनका यह व्यापार पूरी तरह से पर्यटकों पर निर्भर था, इसलिए ज्यादा मुनाफा ना होते देख उन्होंने इस काम को भी बंद कर दिया।

जब धीरूभाई सिर्फ 17 साल के थे, तो वह पैसे कमाने के लिए साल 1949 में अपने भाई रमणिकलाल के पास यमन चले गए थे। वहां धीरूभाई ने एक पेट्रोल पंप पर 300 रुपए महीने प्रतिमाह से नौकरी की शुरूआत की थी। कुछ साल नौकरी करने के बाद धीरूभाई 1954 में स्वदेश लौट आए और 500 रुपए लेकर मुंबई पहुंच गए।

यहां अंबानी ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर पॉलिस्टर धागे का व्यापार शुरू किया। यमन में काम करने के दौरान धीरूभाई ने कई स्थानीय लोगों से जान-पहचान कर ली थी, जिसके चलते वह भारत से यमन में मसालों का भी निर्यात करने लगे।

शेख को बेची थी मिट्टीः बताया जाता है कि धीरूभाई बिजनेस के इतने पक्के खिलाड़ी थे कि उन्होंने एक बार दुबई के एक शेख को मिट्टी बेच दी थी। दरअसल दुबई के शेख को अपने यहां गुलाब का गार्डन बनाना था। इसके लिए धीरूभाई अंबानी ने दुबई के इस शेख के लिए भारत से मिट्टी भेजी और इसके बदले उससे इसके पैसे वसूले। पॉलिस्टर के बिजनेस के दम पर धीरूभाई ने मुंबई के यार्न उद्योग पर अपना कब्जा कर लिया था।

पेट्रोकेमिकल बिजनेस में जमायी धाकः साल 1981 में धीरूभाई अंबानी के बड़े बेटे मुकेश अंबानी ने अपने पिता का बिजनेस ज्वाइन किया और फिर रिलायंस कंपनी ने पॉलिस्टर फाइबर से पेट्रोकेमिकल और पेट्रोलियम बिजनेस की तरफ शिफ्ट किया। इसके बाद से रिलायंस ग्रुप ने बड़ी तेजी से विकास किया और आज यह देश की सबसे बड़ी कंपनी है। बता दें कि रिलायंस देश की पहली कंपनी थी, जो फोर्ब्स की 500 लिस्ट में शामिल हुई थी। भारत में बिजनेस के क्षेत्र में धीरूभाई अंबानी के योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण अवार्ड से नवाजा था। 6 जुलाई, 2002 को हार्ट अटैक के चलते धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया था।


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By udaen

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