विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विभाग में अधिकारियों की कमी को देखते यह निर्णय लिया गया है। शासन की ओर से शिक्षा निदेशालय से इसका प्रस्ताव मांगे जाने के बाद निदेशालय शासन को इसका प्रस्ताव भेज चुका है।
प्रदेश में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के तबादलों में पारदर्शिता के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 बनाया गया था। पांच जनवरी 2018 को इसकी अधिसूचना जारी की गई। एक्ट में यह व्यवस्था की गई है कि कर्मचारियों एवं अधिकारियों के संपूर्ण सेवाकाल को देखकर ही उनके सुगम से दुर्गम और दुर्गम क्षेत्र से सुगम में तबादले किए जाएंगे।
तबादलों के लिए समय सारणी जारी कर एक निश्चित अवधि में यह तबादले होेंगे, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि विभाग में अधिकारियों की कमी बनी है। यदि सुगम और दुर्गम क्षेत्रों की सेवाओं के आधार पर अधिकारियों के तबादले किए जाएं तो बहुत कम अधिकारी तबादलों के दायरे में आ रहे हैं।
इससे जरूरत के हिसाब से अधिकारियों की विभिन्न जनपदों में तैनाती नहीं हो पा रही है। जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि आईएएस अधिकारियों की तर्ज पर उन्हें भी एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाए। शासन के सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव विधानसभा से मंजूरी के बाद ही अमल में आ सकेेगा।
