‘एक जेल-एक उत्पाद’ पहल के तहत पिरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण का शुभारंभ, आत्मनिर्भर बनेंगे बंदी
जेलों को सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला कारागार पौड़ी में ‘‘एक जेल-एक उत्पाद‘‘ पहल के तहत पिरूल क्राफ्ट आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
SHABD,Dehradun, July 7,
Category: Social Welfare, Police, Planning
‘एक जेल-एक उत्पाद’ पहल के तहत पिरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण का शुभारंभ,
आत्मनिर्भर बनेंगे बंदी
जेलों को सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला कारागार पौड़ी में ‘‘एक जेल-एक उत्पाद‘‘ पहल के तहत पिरूल क्राफ्ट आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
07 जुलाई 2026, पौड़ी गढ़वाल:
जेलों को सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला कारागार पौड़ी में ‘‘एक जेल-एक उत्पाद‘‘ पहल के तहत पिरूल क्राफ्ट आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसका संचालन जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से जनकल्याण सेवा समिति, कोटद्वार द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को पिरूल से आकर्षक और उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे रिहाई के बाद वे स्वरोजगार स्थापित कर सम्मानजनक जीवन जी सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से तैयार होने वाले उत्पादों की देश-विदेश के बाजारों में लगातार मांग बढ़ रही है। पिरूल जैसे वन संसाधन को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षण को केवल कौशल विकास तक सीमित न रखते हुए इसे उद्यमिता से जोड़ने पर बल दिया, ताकि बंदियों को भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके। जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण में सजावटी वस्तुएं, गृह उपयोगी सामग्री और अन्य नवाचार आधारित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तैयार उत्पादों की बाय-बैक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी और उससे प्राप्त आय का उपयोग बंदी कल्याण व उनके पुनर्वास संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे बंदियों का उत्साह भी बढ़ेगा और उन्हें अपने कौशल का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्तियों में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से पुनः जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनके भीतर आत्मविश्वास विकसित किया जा सकता है, जिससे वे भविष्य में अपराध से दूर रहकर सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर होंगे।
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कैप्शन_ जिला कारागार पौड़ी में ‘‘एक जेल-एक उत्पाद‘‘ पहल के तहत उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
