सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: रिहायशी इलाकों का ‘कमर्शियल दुरुपयोग’ अब नहीं चलेगा
देश में तेजी से बढ़ रहे अवैध भूमि उपयोग पर ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि रिहायशी क्षेत्रों को बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
और की बेंच ने कहा कि लोग अपने घर शांति, सुरक्षा और बेहतर जीवन की उम्मीद में खरीदते हैं, लेकिन जब आसपास अवैध दुकानें, गोदाम या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो जाती हैं, तो उनका यह अधिकार प्रभावित होता है।
कोर्ट के मुख्य निर्देश:
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में व्यापक जांच होगी
- नगर निगम और विकास प्राधिकरण यह पहचान करेंगे कि कहां-कहां रिहायशी इलाकों का अवैध कमर्शियल उपयोग हो रहा है
- हर मामले की विस्तृत सूची हलफनामे के रूप में कोर्ट में पेश करनी होगी
- रिपोर्ट पर नगर आयुक्तों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जांच केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन क्षेत्रों तक भी जाएगी जो कागजों में भले नगर सीमा से बाहर हों, लेकिन व्यवहार में शहरी ढांचे का हिस्सा बन चुके हैं।
मामले में अदालत की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। अगली सुनवाई 20 मई 2026 को होगी, जिसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
क्यों है यह फैसला अहम?
यह आदेश शहरी नियोजन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों के लिहाज से मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर लगाम लगेगी, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याओं में कमी आएगी और लोगों को उनके रिहायशी अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा मिल सकेगी।
👉 साफ है—अब “घर” को “बाजार” बनाने की मनमानी पर सख्त रोक लगने वाली है।
