PIB Delhi
नीति आयोग ने असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (जीबीएसआईपीआरडी) के सहयोग से 28 सितंबर, 2026 को ‘विकसित पंचायतः व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों का संयोजन’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला ‘विकसित भारत@2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप पंचायतों को समावेशी विकास, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण और जमीनी स्तर पर सतत प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम संस्थाओं के रूप में मजबूत करने पर केंद्रित थी।
इस एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन असम सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अतुल बोरा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य डॉ आर बालासुब्रमण्यम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके साथ असम सरकार के मुख्य सचिव डॉ रवि कोटा और ग्रामीण विकास मंत्रालय में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र के दौरान विकसित ग्राम पंचायतों को आगे बढ़ाने के लिए विकेंद्रीकृत शासन, स्थानिक नियोजन, क्षमता विकास, डिजिटलीकरण और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। विचार-विमर्श के मुख्य चार क्षेत्र निम्नलिखित रहेः विकेंद्रीकृत और स्थानिक नियोजन, जमीनी स्तर पर क्षमता विकास, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानिक नियोजन और ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) प्रक्रिया में स्थानिक नियोजन का एकीकरण।
प्रतिभागियों ने संविधान के 73वें संशोधन और खंड 9 के तहत पंचायती राज की सांवैधानिक बुनियाद पर चर्चा की। इसके अलावा स्पष्ट गतिविधि मानचित्रण, पर्याप्त वित्तीय संसाधन, उचित कर्मचारी संख्या, निर्णय लेने के अधिक अधिकार, ग्राम सभा की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही पर भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला में स्थानीय विकास के लिए पारंपरिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक स्थानिक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
स्थानीय संसाधनों, अवसंरचना की कमियों, भूमि-उपयोग के पैटर्न और विकास के अवसरों की पहचान के लिए जीआईएस, भू-स्थानिक डेटा, ग्राम मास्टर प्लान और डिजिटल प्लेटफार्मों पर चर्चा की गई। साक्ष्य आधारित और अभिसरण उन्मुख योजना को मजबूत करने के साधन के रूप में स्थानिक जानकारी को जीपीडीपी, ई-ग्राम स्वराज और पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएमआई) के साथ एकीकृत करने पर प्रकाश डाला गया।
क्षमता विकास और संस्थागत मजबूती के विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। प्रतिभागियों ने निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों को डेटा की व्याख्या, निवेश प्राथमिकता, संसाधन प्रबंध, अभिसरण और परिणाम निगरानी में कुशल बनाने पर जोर दिया। चर्चाओं में अधिकारों के विकेंद्रीकरण, गतिविधि मानचित्रण, जिला योजना समितियों, डिजिटल और हाइब्रिड लर्निंग, योग्यता विकास और अंतिम छोर तक तकनीकी सहायता को कवर किया गया। डॉ आर बालासुब्रमण्यम ने क्षेत्रीय नियोजन से हटकर स्थानिक नियोजन दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, जिसमें मानव एवं सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूह के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।
कार्यशाला में जिन प्राथमिकताओं की पहचान की गई, उनमें स्पष्ट कार्यात्मक विकेंद्रीकरण और गतिविधि मानचित्रण, बेहतर वित्तीय संसाधन और स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण, मजबूत क्षमता और तकनीकी सहायता, क्रियाशील जिला योजना समितियां तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच बेहतर अभिसरण शामिल है। जीपीडीपी स्थानिक और प्रशासनिक डेटा के उपयोग को सुदृढ़ करने, ग्राम सभा और सामुदायिक भागीदारी तथा जिला स्तर पर ग्रामीण-शहरी नियोजन को मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
