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डाक प्रशिक्षण केंद्र, सहारनपुर की प्लेटिनम जयंती: केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने संस्थान की 75 वर्षों की उत्कृष्टता के उपलक्ष्य में स्मारक डाक टिकट जारी किया


डाक प्रशिक्षण केंद्र, सहारनपुर महज एक संस्थान नहीं, बल्कि सेवा की एक जीवंत विरासत है: श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

PIB Delhi

डाक विभाग ने प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण में उत्कृष्टता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सहारनपुर स्थित डाक प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) की प्लेटिनम जयंती के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।

यह डाक टिकट केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा रंग भवन सभा, आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में जारी किया गया। इस कार्यक्रम में डाक सेवा महानिदेशक श्री जितेंद्र गुप्ता, डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) के सदस्य (वित्त) श्री मनीष सिन्हा, महानियंत्रक संचार लेखा (सीजीसीए) की सुश्री वंदना गुप्ता और सदस्य (मानव संसाधन विकास) कर्नल एसएफएच रिजवी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

(बाएं से दाएं: कर्नल एसएफएच रिजवी, सदस्य (मानव संसाधन विकास), श्री जितेंद्र गुप्ता, महानिदेशक, डाक सेवाएं, श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, श्री मनीष सिन्हा, सदस्य (वित्त), डीसीसी, सुश्री वंदना गुप्ता, सीजीसीए)

सभा को संबोधित करते हुए श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस अवसर को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि डाक प्रशिक्षण केंद्र मात्र एक संस्थान नहीं बल्कि एक ऐसा स्थान है जहां इतिहास जीवंत है और निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूरे होने का यह उत्सव राष्ट्र निर्माण में डाक प्रशिक्षण केंद्र के अटूट योगदान को दर्शाता है।

भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक न केवल देश के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक लॉजिस्टिक पॉवर हाउस बनने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है। उन्होंने इस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने में डाक विभाग और उसके कर्मचारियों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

2 अप्रैल, 1951 को स्थापित, सहारनपुर डाक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका उद्देश्य डाक कर्मियों के लिए एक संरचित और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली शुरू करना था जिसमें अनौपचारिक कार्य-आधारित प्रशिक्षण को 56.71 एकड़ के परिसर में एक व्यवस्थित संस्थागत ढांचे से प्रतिस्थापित किया गया था। वर्षों से, यह उत्तरी भारत के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डाक कर्मियों को सेवा प्रदान करने वाला एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान बन गया है। आज यह 11 उन्नत कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और एक विशेष ई-स्टूडियो से सुसज्जित है जो प्रतिवर्ष लगभग 3,000 कर्मचारियों को ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन और वित्तीय समावेशन में कौशल प्रदान करते हुए प्रशिक्षित करता है, साथ ही अनुशासन, विश्वसनीयता और सार्वजनिक सेवा के मूल मूल्यों को भी उनमें समाहित करता है।

यह स्मारक डाक टिकट अब पूरे भारत में डाक टिकट संग्रह केंद्रों पर उपलब्ध है और इसे www.epostoffice.gov.in पर ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है ।


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By udaen

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