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सरकार ने ‘राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ और ‘टेली मानस’ मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया

PIB Delhi

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ का संचालन कर रही है, जिसके दायरे में प्रसवोत्तर माताओं (बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं) को भी शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम के प्रमुख घटक, ‘जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (डीएमएचपी) को अब तक देश के 767 जिलों में लागू करने की मंजूरी दी जा चुकी है, जिसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ के माध्यम से आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर पर उपलब्ध इन सुविधाओं में मुख्य रूप से ओपीडी सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन, काउंसलिंग और मनो-सामाजिक परामर्श शामिल हैं। इसके साथ ही, गंभीर मानसिक विकारों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए निरंतर देखभाल, दवाएं, आउटरीच और एम्बुलेंस जैसी सेवाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। इन सुविधाओं के अतिरिक्त, जिला स्तर पर मरीजों के लिए 10 बिस्तरों वाले इन-पेशेंट सुविधा का भी विशेष प्रावधान है।

सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। इसके तहत, सरकार ने 1.83 लाख से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ के रूप में अपग्रेड किया है। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रदान की जाने वाली ‘व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल’ के सेवा पैकेजों में अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल कर लिया गया है। आयुष्मान भारत के दायरे में, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों के लिए मानसिक, तंत्रिका संबंधी और मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित विकारों (एमएनएस) पर परिचालन दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण नियमावली भी जारी की गई हैं। एनएमएचपी के ‘तृतीयक देखभाल’  घटक के अंतर्गत, मानसिक स्वास्थ्य विशिष्टताओं में पीजी विभागों में छात्रों की संख्या बढ़ाने और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए 25 ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य विशिष्टताओं के 47 पीजी विभागों को मजबूत बनाने के लिए 19 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को भी आवश्यक सहायता प्रदान की है।

देश में प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) से पीड़ित महिलाओं के विस्तृत आंकड़े केंद्रीय स्तर पर नहीं रखे जाते हैं। हालांकि, बंगलूरू स्थित  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (एनआईएमएनएचएस) द्वारा 2016 में देश के 12 राज्यों में आयोजित ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (एनएमएचएस) के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में अवसाद संबंधी विकारों का प्रसार लगभग 5.72 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत, एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रसवोत्तर माताओं के मानसिक स्वास्थ्य सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का नियमित रूप से आकलन करती हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, व्यापक प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ता छह बार घर जाकर जाँच करती हैं, जिसमें प्रसवोत्तर अवसाद की जांच भी शामिल है। इस मूल्यांकन के दौरान लक्षणों की पहचान की जाती है और आवश्यकतानुसार माता को ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (पीएमएसएमए) या ‘विस्तारित-पीएमएसएमए’ के तहत उचित स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाता है। ‘प्रसवोत्तर देखभाल के अनुकूलन’ योजना के तहत, समय पर प्रबंधन और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का भी प्रावधान है।

वर्तमान में देश में सरकार द्वारा संचालित 47 मानसिक अस्पताल हैं। इनमें तीन प्रमुख केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं, जिनमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बेंगलुरु, लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई  रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (तेजपुर, असम) और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री, रांची मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त, देश के सभी एम्स संस्थानों में भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उपरोक्त सेवाओं के अतिरिक्त, सरकार ने देश में गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और देखभाल सेवाओं तक पहुँच को और बेहतर बनाने के लिए 10 अक्टूबर, 2022 को ‘राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ शुरू किया है। 3 मार्च, 2026 तक की स्थिति के अनुसार, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 ‘टेली मानस’ सेल स्थापित किए जा चुके हैं और वहां टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो गई हैं। अब तक हेल्पलाइन नंबर पर लगभग 34.34 लाख कॉल अटेंड की जा चुकी हैं।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।


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By udaen

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