उत्तराखंड: अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर आस्था और संस्कृति का अद्वितीय केंद्र
अल्मोड़ा में विराजमान मां नंदा देवी का मंदिर श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय केंद्र है।
SHABD,Dehradun, March 22,
उत्तराखंड: अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर आस्था और संस्कृति का अद्वितीय केंद्र
अल्मोड़ा में विराजमान मां नंदा देवी का मंदिर श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय केंद्र है। वासंतिक और शारदीय नवरात्र के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मां नंदा देवी मंदिर अल्मोड़ा की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है। कुमाऊं के राजा बाज बहादुर चंद ने 1638-78 के बीच नंदा देवी की प्रतिमा को अल्मोड़ा के रामशिला मंदिर में स्थापित किया। 1816 में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर जी.डब्ल्यू. ट्रेल ने इसे वर्तमान दीपचंद्रेश्वर मंदिर के अग्र भाग में स्थापित किया। मंदिर की विशेषता यह है कि यह चंद वंशिय शासकों के शासन काल में निर्मित नागर शैली का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। भाद्रपद मास में आठ दिवसीय मेला लगता है, जिसमें नंदा जागर गायन और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मां नंदा देवी को हिमालय की पुत्री माना जाता है और श्रद्धालु मानते हैं कि मां उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मां नंदा देवी उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी हैं। भक्त इसे अपने जीवन में आध्यात्मिक शांति और शक्ति का केंद्र मानते हैं। अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी है। मां नंदा देवी की उपासना और मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इसे राज्य की अनमोल धरोहर बनाता है।
बाइट 1- पंडित प्रमोद पाठक, पुजारी
बाइट 2- तनुजा पाठक, श्रद्धालु
