पद्म श्री सम्मान से अलंकृत होंगे खेमराज सुंदरियाल, बुनकर कला को दिया वैश्विक पहचान
नई दिल्ली/उत्तराखंड।
केंद्र सरकार द्वारा 26 जनवरी के पावन अवसर पर उत्तराखंड के वरिष्ठ बुनकर एवं शिल्पकार श्री खेमराज सुंदरियाल जी को “पद्म श्री” सम्मान से अलंकृत किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान न केवल उनके दीर्घकालीन रचनात्मक योगदान का प्रतीक है, बल्कि पारंपरिक बुनकर कला के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

श्री सुंदरियाल की प्रारंभिक शिक्षा सुमाड़ी में हुई। इसके पश्चात उन्होंने आईआईटी श्रीनगर से वीविंग (बुनकर कला) में विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने दिल्ली क्लॉथ मिल (DCM) तथा बनारस के बुनकर सेवा केंद्र सहित प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएँ दीं।
वर्ष 2001 में सेवानिवृत्ति के पश्चात भी उनका सृजनात्मक सफर थमा नहीं। उन्होंने पानीपत (हरियाणा) में खड्डी आधारित लघु उद्योग स्थापित कर बुनकर कला को नए आयाम दिए और इसे स्वरोजगार से जोड़ा।
खेमराज सुंदरियाल जी ने वीविंग के माध्यम से गणपति, सरस्वती, देवी-देवताओं, भूतपूर्व राष्ट्रपतियों एवं अनेक महान व्यक्तित्वों की अद्भुत कलाकृतियाँ सृजित कीं। उनकी ये कृतियाँ दिल्ली, मुंबई सहित देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शित हो चुकी हैं और कला प्रेमियों से भरपूर सराहना प्राप्त कर चुकी हैं।
उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें संत कबीर अवार्ड, ललित कला अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें माननीय राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया है।
विशेष बात यह है कि 84 वर्ष की आयु में भी श्री सुंदरियाल जी सक्रिय रूप से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बुनकर कला का प्रशिक्षण देकर युवाओं और कारीगरों को प्रेरित कर रहे हैं। उनकी यह स्पष्ट अभिलाषा है कि यह पारंपरिक हुनर उत्तराखंड के युवाओं तक पहुँचे, ताकि रोज़गार के नए अवसर सृजित हो सकें।
पद्म श्री सम्मान की यह घोषणा निस्संदेह उत्तराखंड सहित समूचे देश के लिए गौरव का विषय है और यह सिद्ध करती है कि समर्पण, साधना और सृजन से पारंपरिक कला को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।
